ईडी की बड़ी कार्रवाई: कंबोडिया से भारत में सैकड़ों करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, राजस्थान और पंजाब के 7 ठिकानों पर छापेमारी

जयपुर, 9 जून (अन्‍नू): देश में पैर पसार रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों और उनके मददगारों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी के जयपुर जोनल ऑफिस ने सीमा पार (कंबोडिया और मलेशिया) से संचालित होने वाले एक बेहद शातिर और बड़े साइबर फ्रॉड व मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के सदस्य भारत में फर्जी तरीके से सिम कार्ड एक्टिवेट कर उन्हें विदेशी हैंडलर्स को भेजते थे, जिसके जरिए भारत के ही निर्दोष नागरिकों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की जा रही थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी की टीमों ने 5 जून 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत राजस्थान और पंजाब के 4 प्रमुख शहरों— किशनगढ़ (अजमेर), नागौर, जोधपुर और लुधियाना (पंजाब) में कुल 7 संदिग्ध परिसरों/ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन (छापेमारी) चलाया।

जोधपुर साइबर क्राइम थाने की एफआईआर (FIR) से खुला राज

ईडी की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच जोधपुर के साइबर पुलिस स्टेशन (DCP क्राइम) में दर्ज एक प्राथमिक एफआईआर (FIR) के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर कुछ सिम कार्ड वेंडर्स (Point of Sale - POS) के खिलाफ सिम कार्ड के दुरुपयोग और अवैध एक्टिवेशन को लेकर दर्ज कराई गई थी।

जब ईडी ने इस मामले की गहन कड़ाई से जांच की, तो एक बेहद चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सामने आया। जांच में पता चला कि भारत के स्थानीय सिम वेंडर्स ने धोखाधड़ी से हजारों की संख्या में भारतीय मोबाइल नंबर (सिम कार्ड) एक्टिवेट किए थे। इन एक्टिवेटेड सिम कार्ड्स को कंबोडिया भेजा गया, जहां से भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों को व्हाट्सएप (WhatsApp) कॉल और मैसेज करके सैकड़ों करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा था।

2.3 लाख नंबरों की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

ईडी द्वारा किए गए तकनीकी विश्लेषण में इस नेटवर्क की भयावहता का पता चला है:

  • जांचे गए नंबर: लगभग 2.3 लाख (2,30,000) संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया।

  • कंबोडिया में एक्टिव सिम: जांच में पाया गया कि इनमें से करीब 36,000 सिम कार्ड सीधे तौर पर कंबोडिया में एक्टिव थे और वहीं से ऑपरेट हो रहे थे।

  • फ्रॉड में शामिल नंबर: इन एक्टिव सिम कार्ड्स में से लगभग 5,300 सिम कार्ड सीधे तौर पर पूरे भारत में सैकड़ों करोड़ रुपये के अलग-अलग साइबर फ्रॉड मामलों को अंजाम देने में लिप्त पाए गए हैं।

मासूम और कम पढ़े-लिखे लोगों को बनाते थे शिकार, एयरटेल-जियो की पीओएस आईडी का दुरुपयोग

प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट के पीछे राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट मुख्य भूमिका में थे। ये तीनों अन्य सिम वेंडर साथियों— प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलाकार और हेमंत पंवार के साथ मिलकर मिलीभगत (Connivance) से काम कर रहे थे।

इन सिम वेंडर्स के पास प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स जैसे एयरटेल (Airtel), जियो (JIO) और वीआई (VI) की आधिकारिक पॉइंट ऑफ सेल (POS) आईडी थी, जिसका इस्तेमाल सिम कार्ड जारी करने और एक्टिवेट करने के लिए किया जाता था।

धोखाधड़ी का तरीका: ये वेंडर्स मुख्य रूप से कम पढ़े-लिखे, सीधे-साधे और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपना निशाना बनाते थे। सिम पोर्ट करने या नया सिम कार्ड जारी करने के बहाने ये आरोपी उन भोले-भाले ग्राहकों के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक का इस्तेमाल करते थे। ग्राहक के सामने एक सिम एक्टिवेट करने के साथ-साथ ये धोखे से उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड भी एक्टिवेट कर लेते थे। इसके बाद इन अतिरिक्त फर्जी सिम कार्ड्स को राहुल कुमार झा और उसके सहयोगियों के माध्यम से प्रति सिम तय कमीशन लेकर मलेशियाई और कंबोडियन नागरिकों (हैंडलर्स) को सप्लाई कर दिया जाता था।

30 बैंक खाते फ्रीज, करोड़ों की चल-अचल संपत्ति और दस्तावेज जब्त

ईडी ने बताया कि इस व्यापक सर्च ऑपरेशन के दौरान आरोपियों के ठिकानों से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और आपत्तिजनक दस्तावेज/सामग्री जब्त की गई है। इस कार्रवाई के दौरान आरोपियों से जुड़े करीब 30 बैंक खातों (Bank Accounts) की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही आरोपियों द्वारा साइबर ठगी और कमीशन की काली कमाई से बनाई गई कई चल और अचल संपत्तियों का भी भंडाफोड़ हुआ है। ईडी के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ने के लिए मामले में आगे का अनुसंधान और जांच तेजी से जारी है।

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