ED का बड़ा एक्शन: अरुणाचल प्रदेश-असम अवैध शराब तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, छापेमारी में बेनामी लाइसेंस और फर्जी मुहरें बरामद

अरुणाचल प्रदेश, 25 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED), गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने 23 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में एक बड़े अवैध शराब तस्करी नेटवर्क के खिलाफ छापेमारी की। ईटीानगर, नाहरलगुन, सेप्पा, जीरो, डपोरिजो, नामसाई और रोइंग समेत 9 स्थानों पर की गई इस कार्रवाई के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े सबूत हाथ लगे हैं। यह जांच असम पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और असम आबकारी विभाग (Excise Department) की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी।


कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?

ईडी की जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच आबकारी शुल्क (Excise-duty) के अंतर का फायदा उठाता था। इस नेटवर्क का संचालन तीन मुख्य किंगपिन द्वारा किया जा रहा था, जो 25 से अधिक संस्थाओं को नियंत्रित करते थे। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:


बेनामी संचालन: हर इकाई को स्थानीय निवासियों के नाम पर 'बेनामी' या 'डमी' लाइसेंस के जरिए चलाया जा रहा था, जबकि असली नियंत्रण किंगपिन के पास था।


वित्तीय हेराफेरी: थोक विक्रेताओं के बैंक खातों में 51% से 90% तक की राशि का 'अस्पष्ट नकद जमा' (unexplained cash deposits) मिला है।


इनवॉइस में खेल: टैक्स से बचने के लिए सिस्टेमेटिक तरीके से इनवॉइस को 2 लाख रुपये से नीचे तोड़ा जाता था। एक ही स्थान पर एक महीने में 1.99 लाख रुपये के 200 से अधिक बिल पाए गए।


छापेमारी में जब्त सामान

ईडी की कार्रवाई के दौरान लगभग 40 लाख रुपये की अस्पष्ट नकदी जब्त की गई है। इसके अलावा, छापेमारी में 14 फर्जी मुहरें भी मिली हैं, जिनमें अरुणाचल प्रदेश सरकार के 'आबकारी विभाग' की मुहरें भी शामिल हैं। इनका उपयोग परिवहन परमिट (transport permits) बनाने और अवैध रूप से असम में शराब तस्करी करने के लिए किया जाता था।


जांच का दायरा बढ़ा

अक्टूबर 2024 में दर्ज किए गए ईसीआईआर (ECIR) के बाद अब इस मामले का दायरा बढ़ाकर इसमें 173 नई एफआईआर को जोड़ दिया गया है। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि कैसे जनजातीय साझेदारी और डमी लाइसेंस के पीछे असली मालिकों को छिपाया गया था। फिलहाल, इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ जांच जारी है।


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