दिल्ली क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: ISI समर्थित टेरर व आर्म्स तस्करी मॉड्यूल के 2 और गुर्गे गिरफ्तार, नेपाल के रास्ते आते थे हथियार

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ARSC) ने एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो और मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान इमरान (37) और कामरान (27) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले हैं। इन दोनों को लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। यह मॉड्यूल मुख्य सरगना शाहबाज अंसारी के इशारे पर काम कर रहा था।


UAPA के तहत कार्रवाई: अब तक 12 गिरफ्तार और 23 विदेशी हथियार बरामद


इस मामले की गंभीरता और देश की सुरक्षा से जुड़े तथ्यों को देखते हुए पुलिस ने 31 मार्च 2026 को इस केस में UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की धाराएं जोड़ दी हैं। अब तक इस पूरे नेटवर्क के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने इनके पास से अब तक 23 विदेशी अत्याधुनिक हथियार (जिनमें सब-मशीन गन भी शामिल है) और 211 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।



हथियारों के लिए कार में बनाई थी 'सीक्रेट कैविटी'


गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने बुलंदशहर से एक मारुति स्विफ्ट कार बरामद की है। इस कार को विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया था और इसमें हथियारों को छिपाकर ले जाने के लिए गुप्त कैविटी (खाली जगह) बनाई गई थी, जो सामान्य चेकिंग में दिखाई नहीं देती थी। ताजा छापेमारी में इमरान और कामरान के पास से चीन निर्मित .30 बोर पिस्टल, .32 बोर रिवॉल्वर और 11 कारतूस बरामद हुए हैं।


नेपाल और थाईलैंड के रास्ते पाक-ISI का 'डेथ नेटवर्क'


जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे सिंडिकेट को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन प्राप्त है। हथियारों की तस्करी का रूट बेहद जटिल था:

रूट: हथियार पाकिस्तान से चलते थे, फिर थाईलैंड और वहां से नेपाल पहुँचते थे।
तरीका: पकड़े जाने के डर से हथियारों को 'डिस्मंतल' (पुर्जे अलग-अलग) करके भारत लाया जाता था।
असेंबलिंग: इमरान और कामरान नेपाल जाकर इन हथियारों की खेप लेते थे, फिर भारत लाकर उन्हें दोबारा जोड़ते (Reassemble) और दिल्ली-NCR सहित देश के अन्य हिस्सों में एंटी-नेशनल तत्वों को सप्लाई करते थे।


भारत को अस्थिर करने की बड़ी साजिश

डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा को अस्थिर करना और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना था। हथियारों की बिक्री से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जाना था। पुलिस के अनुसार, ये अत्याधुनिक हथियार किसी बड़ी आतंकी घटना या 'हाई-इम्पैक्ट' ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मंगाए गए थे।


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