फर्जी सरकारी अफसर बन ठगी करने के मामले में ED की बड़ी कार्रवाई; निलंबित IAS अभिषेक चंद्रा और मुख्य आरोपी की ₹1.12 करोड़ की संपत्ति कुर्क
त्रिपुरा, 01 अगस्त (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय के अगरतला सब जोनल कार्यालय ने सरकारी अधिकारियों का रूप धारण कर निवेशकों और व्यवसायियों से धोखाधड़ी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ₹1.12 करोड़ मूल्य की बैंक बैलेंस राशि को अनंतिम रूप से कुर्क कर लिया है।
कुर्क की गई संपत्ति में मुख्य आरोपी उत्पल कुमार चौधरी, त्रिपुरा कैडर के निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक चंद्रा और एक प्राइवेट हाउसिंग कंपनी द्वारा नियंत्रित शेल संस्थाओं के बैंक खाते शामिल हैं।
फर्जी पहचान पत्र और सरकारी विभागों के नाम पर ठगी
ईडी की जांच पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा पुलिस द्वारा उत्पल कुमार चौधरी और उसके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी (Forgery) और आपराधिक विश्वासघात के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
गृह मंत्रालय का फर्जी अफसर: जांच में सामने आया कि उत्पल कुमार चौधरी ने खुद को केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर फर्जी आई-कार्ड बनवाए थे।
फर्जी सरकारी संस्थाएं: आरोपी ने 'डायरेक्टरेट ऑफ हायर एजुकेशन, त्रिपुरा' और 'M/s ब्रिज एंड रूफ कं.' जैसे सरकारी विभागों व सार्वजनिक उपक्रमों से मिलते-जुलते नाम वाली फर्जी फर्में बनाईं।
टेंडर और मिड-डे मील के नाम पर ठगी: आरोपी ने व्यवसायियों और निवेशकों को सरकारी टेंडर, मिड-डे मील सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट और रबर बिजनेस में भारी मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये इन खातों में ट्रांसफर करवाए।
निलंबित IAS अभिषेक चंद्रा की भूमिका
जांच में खुलासा हुआ कि त्रिपुरा कैडर के निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी अभिषेक चंद्रा ने उत्पल कुमार चौधरी और उसके गिरोह द्वारा जुटाए गए 'काले धन' को अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किया। इसके अलावा, एक प्राइवेट हाउसिंग कंपनी में अपने नाम पर फ्लैट बुकिंग के लिए भी इस राशि का इस्तेमाल करवाया।
अब तक कुल ₹1.63 करोड़ की संपत्ति जब्त
ईडी ने बताया कि शेल कंपनियों के जरिए जमा किए गए फंड को नकद निकालकर आपस में बांटा गया और अचल संपत्तियों व वाहनों में निवेश किया गया।
ताजा आदेश के साथ ही इस मामले में दो अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए अब तक कुर्क की गई कुल संपत्ति का मूल्य ₹1.63 करोड़ हो गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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