इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी मामले में ED का बड़ा एक्शन: कई कंपनियों और आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दर्ज, ₹2.14 करोड़ की संपत्ति कुर्क

जालंधर, 16 जुलाई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जालंधर आंचलिक कार्यालय ने संगठित आप्रवासन (इमिग्रेशन) और वीजा धोखाधड़ी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने इस अपराध से अर्जित काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप में कई फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ जालंधर की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत के समक्ष एक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दर्ज की है।

यह कार्रवाई मेसर्स रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, अमनदीप सिंह, पूनम रानी, अंकुर कुमार केहर, नितिन विज, कमलजोत कंसल, मेसर्स ओवरसीज पार्टनर और मेसर्स रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज के विरुद्ध की गई है।

अमेरिकी दूतावास की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR

ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, नई दिल्ली स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के दूतावास द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर पंजाब और दिल्ली पुलिस ने कई एफआईआर (FIR) दर्ज की थीं। इन प्राथमिकियों के आधार पर ही ईडी ने अपनी जांच और तलाशी अभियान शुरू किया। जांच में सामने आया कि आरोपी एक सुनियोजित साजिश के तहत अमेरिका जाने वाले छात्रों और आगंतुकों के लिए फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र, मनगढ़ंत अनुभव प्रमाण-पत्र, जाली वित्तीय विवरण और बैंकों में झूठी धनराशि दिखाकर धोखाधड़ी से वीजा तैयार करवाते थे।

कम योग्यता वालों को बनाते थे निशाना, वसूलते थे मोटी रकम

ईडी की जांच में उजागर हुआ कि अमनदीप सिंह और पूनम रानी द्वारा प्रबंधित 'मेसर्स रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड' ऐसे आवेदकों को निशाना बनाती थी जिनके पास जरूरी शैक्षणिक योग्यता या वित्तीय पात्रता नहीं होती थी। इन कमियों को छिपाने के लिए जाली दस्तावेज, गैप कवर सर्टिफिकेट और बैंकों में अस्थायी फंड की व्यवस्था करने के बदले आवेदकों से भारी रकम वसूली जाती थी। विदेशी विश्वविद्यालयों और वीजा अधिकारियों के साथ की जाने वाली पूरी ईमेल बातचीत को आरोपी खुद अपने स्तर पर नियंत्रित करते थे।

झूठा बैंक बैलेंस दिखाने का खेल: प्रति आवेदक 40 हजार का कमीशन

जांच में एक और बड़े गठजोड़ का खुलासा हुआ है। अंकुर कुमार केहर (संचालक मेसर्स ओवरसीज पार्टनर) ने नितिन विज (संचालक मेसर्स रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज) के साथ मिलकर वीजा आवेदकों के बैंक खातों में अस्थायी रूप से भारी धनराशि जमा कराने का चक्रव्यूह रचा। इस तंत्र के माध्यम से 154 वीजा आवेदकों के खातों में बहुत कम समय के लिए लगभग 40-40 लाख रुपये जमा कराए गए और वित्तीय क्षमता का झूठा प्रमाण पत्र लेकर तुरंत निकाल लिए गए। इस बनावटी वित्तीय व्यवस्था के बदले आरोपियों द्वारा प्रति आवेदक लगभग 40,000 रुपये वसूले जाते थे।

इसके अलावा, कमलजोत कंसल द्वारा संचालित 'मेसर्स इन्फोविज़ सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन' ने उन आवेदकों के लिए फर्जी प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और अनुभव प्रमाण-पत्र तैयार किए जिन्होंने कभी कहीं काम ही नहीं किया था।

लॉकर और परिसरों से सोना, नकदी और डायरियां बरामद

फरवरी 2025 में ईडी द्वारा की गई छापेमारी और परिसरों व लॉकरों की तलाशी के दौरान कई अपराध-संकेती दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अवैध लेनदेन के रिकॉर्ड वाली डायरियां बरामद हुई थीं। इसके साथ ही मौके से 19 लाख रुपये की अघोषित नकदी और लगभग 1 किलोग्राम वजन की सोने की छड़ भी जब्त की गई थी।

₹2.14 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां कुर्क

ईडी ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि इस पूरे रैकेट के माध्यम से अपराध से अर्जित कुल कमाई (Proceeds of Crime) लगभग 2.14 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें से:

  • मेसर्स रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 1.37 करोड़ रुपये

  • मेसर्स ओवरसीज पार्टनर एवं मेसर्स रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा 61.60 लाख रुपये

  • मेसर्स इन्फोविज़ सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन द्वारा 15 लाख रुपये कमाए गए।

ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए इस 2.14 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों (जिसमें आवासीय संपत्तियां और बैंक बैलेंस शामिल हैं) को अस्थायी रूप से कुर्क (सीज) कर दिया है। ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच अभी लगातार जारी है।

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