47 करोड़ से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI का बड़ा एक्शन: 4 राज्यों में छापेमारी कर डिजिटल सबूत और अहम दस्तावेज बरामद

हैदराबाद/नई दिल्ली, 16 जुलाई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच एजेंसी ने 47 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने मेसर्स जुपिटर बायो साइंसेज लिमिटेड (M/s. Jupiter Bio Sciences Ltd), कंपनी के एमडी (MD), निदेशकों, अज्ञात लोक सेवकों और अज्ञात निजी व्यक्तियों के खिलाफ देश के चार अलग-अलग राज्यों में एक साथ सघन तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई यूको बैंक (UCO Bank), हैदराबाद की शिकायत पर बैंक को 47.37 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप में की गई है।

तेलंगाना हाई कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुआ था मामला

सीबीआई की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, यूको बैंक द्वारा दायर रिट याचिका (Writ Petition No. 4112/2025) और सीबीआई द्वारा दायर समीक्षा याचिका (Review Petition No. 1/2026) पर सुनवाई करते हुए माननीय तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इस मामले में निर्देश जारी किए थे। हाई कोर्ट के आदेशों के बाद सीबीआई ने 29 जून 2026 को इस संबंध में औपचारिक मुकदमा दर्ज किया था।

फर्जी इनवॉइस और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई प्रॉपर्टी के जरिए धोखाधड़ी

बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी कंपनी और उसके निदेशकों ने लोन व क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त करने के लिए बैंक के साथ सोची-समझी धोखाधड़ी की। आरोपियों ने इसके लिए फर्जी और मनगढ़ंत प्रोफॉर्मा इनवॉइस (Proforma Invoices) तैयार किए। इसके साथ ही बैंक के पास गिरवी रखी जाने वाली संपत्तियों (Collateral Securities) की वैल्यूएशन रिपोर्ट को भी जानबूझकर काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जिससे बैंक को 47.37 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ा।

कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु में छापेमारी

मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई की विशेष टीमों ने एक साथ कार्रवाई करते हुए कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु राज्यों में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दायरे में मुख्य रूप से आरोपी कंपनी मेसर्स जुपिटर बायो साइंसेज लिमिटेड के निदेशकों से जुड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसर शामिल थे।

फंड ट्रांसफर के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य जब्त

छापेमारी के दौरान सीबीआई ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। इनमें बैंक से लोन ली गई राशि को अन्य जगहों पर ट्रांसफर करने (Diversion of Funds) से जुड़े अहम रिकॉर्ड और जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्रियां शामिल हैं। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि इन सभी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की गहनता से जांच की जा रही है, ताकि इस पूरी साजिश के जाल, फंड के प्रवाह (Flow of Funds) और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके। मामले में आगे की कानूनी तफ्तीश लगातार जारी है।

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