ED की बड़ी कार्रवाई: इंदौर के नव भारत गृह निर्माण सोसाइटी घोटाले में चार्जशीट दाखिल, श्रीकांत घंते समेत 5 पर कसा शिकंजा

इन्दौर, 4 जुलाई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी के इंदौर सब जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी ने इंदौर की 'नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था' (Nav Bharat Grah Nirman Co-operative Society) में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले और धोखाधड़ी के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत माननीय विशेष अदालत, इंदौर के समक्ष एक मुख्य अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint / चार्जशीट) दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट श्रीकांत घंते, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ दर्ज की गई है। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई 2026 को ही प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस भी जारी कर दिए हैं।

इंदौर के एमजी रोड थाने में दर्ज FIR बनी जांच का आधार

ईडी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत इंदौर के थाना एमजी रोड में 'नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड' के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिक एफआईआर (FIR) के बाद हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। चूंकि ये धाराएं पीएमएलए (PMLA) के तहत अनुसूचित अपराध (Scheduled Offences) की श्रेणी में आती हैं, इसलिए ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच शुरू की थी।

सोसाइटी के फंड से खरीदी जमीन दूसरों को बेचकर डकार गए करोड़ों

प्रवर्तन निदेशालय की गहन जांच में सामने आया कि सोसाइटी के चेयरमैन, वाइस प्रेसिडेंट और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों ने मिलकर बेहद शातिर तरीके से एक सुनियोजित घोटाले (Scam) को अंजाम दिया। इन पदाधिकारियों ने अपनी ही संस्था के सीधे-सादे सदस्यों के साथ बेईमानी से धोखाधड़ी की।

  • ऐसे की हेराफेरी: आरोपियों ने नव भारत हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी के फंड से जो जमीनें खरीदी थीं, उन्हें धोखे से अन्य बाहरी संस्थाओं और व्यक्तियों को बेच दिया और इस तरह मिलने वाले करोड़ों रुपये के फंड को सीधे हड़प लिया (Siphoning of funds)।

  • सबूत मिटाने की कोशिश: जांच में खुलासा हुआ कि जमीन की बिक्री से जो 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) पैदा हुई थी, उससे जुड़े बिना हिसाब-किताब वाले तमाम रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों को आरोपियों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से पूरी तरह नष्ट कर दिया था। इस अवैध पैसे को अलग-अलग लेयर्स में घुमाकर छुपाया गया और बाद में इसी फंड से कई अचल संपत्तियां (Immovable Properties) खड़ी कर ली गईं।

नव भारत सहकारी संस्था को पहुँचाया ₹4.64 करोड़ का नुकसान, संपत्तियां कुर्क

ईडी की प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपियों की इस धोखाधड़ी के कारण नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था को सीधे तौर पर ₹4.64 करोड़ का भारी-भरकम और गलत नुकसान (Wrongful Loss) उठाना पड़ा।

इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने इससे पहले 12 फरवरी 2026 को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (Provisional Attachment Order) जारी किया था। इसके तहत मुख्य आरोपी श्रीकांत घंते और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर दर्ज ₹64.16 लाख मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से कुर्क (जब्त) कर लिया गया था। ईडी ने स्पष्ट किया है कि घोटाले की बाकी रकम और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच के लिए तफ्तीश अभी भी सरगर्मी से जारी है।

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