ED का बड़ा एक्शन: हीरा ग्रुप की डॉ. नोवेरा शेख गुरुग्राम से गिरफ्तार, 1.72 लाख निवेशकों से 3000 करोड़ की ठगी का आरोप
नई दिल्ली/हैदराबाद, 23 मई (अन्नू): देश की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 'हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज' की सर्वेसर्वा डॉ. नोवेरा शेख को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है। आरोपी महिला पर देश भर के लाखों निवेशकों को चूना लगाने और करोड़ों रुपये की हेराफेरी (मनी लॉन्ड्रिंग) करने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें हैदराबाद ले जाया गया, जहां माननीय पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है।
36% सालाना रिटर्न का लालच देकर 3000 करोड़ का घोटाला
ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, नोवेरा शेख, मौली थॉमस, बीजू थॉमस और हीरा ग्रुप के खिलाफ तेलंगाना व आंध्र प्रदेश पुलिस ने देश भर के पीड़ित जमाकर्ताओं की शिकायतों पर कई एफआईआर (FIR) दर्ज की थीं। जांच में सामने आया कि नोवेरा शेख ने पाखंड रचते हुए हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज में निवेश के नाम पर देश भर के 1,72,114 सीधे-साधे निवेशकों से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का फंड बटोरा था। निवेशकों को सालाना करीब 36 प्रतिशत का भारी-भरकम मुनाफा (रिटर्न) देने का झांसा दिया गया था, लेकिन बाद में कंपनी न तो मुनाफा दे सकी और न ही मूलधन वापस लौटाया।
निवेशकों का पैसा निजी खातों में किया ट्रांसफर, खरीदीं अकूत संपत्तियां
प्रेस रिलीज के अनुसार, नोवेरा शेख और उनके करीबियों ने कंपनी के बैंक खातों में आए निवेशकों के पैसे को अवैध लाभ कमाने के लिए अपने व्यक्तिगत खातों में डायवर्ट (पार) कर दिया। इस लूटे गए पैसे से उन्होंने देश भर में बड़े पैमाने पर चल और अचल बेनामी संपत्तियां खड़ी कर लीं। ईडी ने जांच के दौरान अपराध की इस कमाई (Proceeds of Crime) से खरीदी गई कई करोड़ की संपत्तियों की पहचान की और उन्हें पीएमएलए के तहत अटैच (जब्त) कर लिया था।
कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
प्रेस रिलीज में बताया गया है कि नोवेरा शेख ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने झूठे तथ्य और फर्जी हलफनामे पेश कर जांच को भटकाने और रोकने की पूरी कोशिश की। उन्होंने दावा किया था कि सी.के. मौला शरीफ नाम का एक व्यक्ति उनकी 580 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदने को तैयार है, लेकिन कोर्ट ने पाया कि उस व्यक्ति के बैंक खाते में कोई पैसा ही नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को भी झूठा हलफनामा देकर तहसीलदारों के जरिए बेचने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आचरण को बेहद गंभीरता से लिया और इतिहास में पहली बार ट्रायल से पहले ही ईडी को उनकी सभी अटैच संपत्तियों की नीलामी करने और पीड़ितों का पैसा 'एसएफआईओ' (SFIO) के जरिए लौटाने का ऐतिहासिक आदेश दे दिया। ईडी ने नीलामी से करीब 122 करोड़ रुपये जुटा भी लिए, लेकिन नोवेरा शेख ने खरीदारों के पक्ष में सेल डीड (रजिस्ट्री) करने में बिल्कुल सहयोग नहीं किया।
सरेंडर करने के बजाय फर्जी आधार कार्ड बनाकर गुरुग्राम में छिपी थीं
सुप्रीम कोर्ट ने नोवेरा शेख के इस अड़ियल रुख पर सख्त नाराजगी जताते हुए उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने और संपत्तियों की रजिस्ट्री करने का अंतिम आदेश दिया था। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया और स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए नोवेरा शेख फरार हो गईं। ईडी ने हैदराबाद और बेंगलुरु में उनके ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन वह गायब थीं। इसके बाद ईडी को खुफिया सूत्रों से इनपुट मिला कि वह हरियाणा के गुरुग्राम (सेक्टर-45) में 'साल्ट स्टेज़' (Salt Stayz) नाम की एक एयरबीएनबी (Air BNB) प्रॉपर्टी में अपनी पहचान छुपाकर छिपी हुई हैं। वह 'शेख खमर जहां' के नाम से बने एक फर्जी आधार कार्ड और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रही थीं, जिसमें उनके साथ समीर खान नाम का एक सहयोगी भी मौजूद था।
हरियाणा पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन में दबोची गईं
इनपुट मिलते ही ईडी के अधिकारियों ने हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर एक साझा और त्वरित ऑपरेशन चलाया। पुलिस और ईडी की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर 21 मई 2026 को उन्हें गुरुग्राम से सफलतापूर्वक दबोच लिया। ईडी ने अपनी प्रेस रिलीज में स्पष्ट कहा है कि पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया में बाधा डालने या कानूनी कार्रवाई से भागने की किसी भी कोशिश से बेहद सख्ती से निपटा जाएगा। मामले की आगे की जांच और संपत्तियों की खोज सरगर्मी से जारी है।
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