CSEM केस में CBI की बड़ी पैरवी: पॉक्सो कोर्ट ने आरोपीको सुनाई 5 साल की कठोर कैद, 1.5 लाख का जुर्माना
नई दिल्ली, 23 मई (अन्नू): बाल यौन शोषण और अश्लील सामग्री (CSEM) के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष पैरवी रंग लाई है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, उत्तर प्रदेश के झांसी की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी रामजी को दोषी करार दिया है। माननीय अदालत ने दोषी रामजी को 5 साल के सश्रम कारावास (कठोर कैद) की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 1.5 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चला रहा था नेक्सस
सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, जांच एजेंसी ने इस मामले को 14 नवंबर 2021 को दर्ज किया था। शुरुआती इनपुट में सामने आया था कि भारत और विदेशों के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय अपराधियों का एक पूरा सिंडिकेट विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ग्रुप्स के जरिए चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन मटीरियल (CSEM) को स्टोर करने, देखने और सर्कुलेट (प्रसारित) करने के अवैध धंधे में लिप्त था। यह सिंडिकेट लिंक्स, वीडियो, तस्वीरों और टेक्स्ट मैसेजेस को थर्ड पार्टी स्टोरेज और सोशल मीडिया ग्रुप्स पर धड़ल्ले से शेयर कर रहा था।
Pdisk अकाउंट्स और फर्जी जीमेल आईडी के जरिए कमाई का खेल
जांच के दौरान सीबीआई की टीम ने जब तकनीकी कड़ियों को जोड़ा, तो आरोपी रामजी की घिनौनी करतूतों का पर्दाफाश हुआ। प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपी रामजी कई फर्जी जीमेल आईडी का इस्तेमाल कर रहा था। इन आईडी की मदद से उसने 'Pdisk' (यूट्यूब जैसा एक फाइल-शेयरिंग प्लेटफॉर्म) पर अलग-अलग यूजरनेम से कई अकाउंट बना रखे थे।
इन Pdisk अकाउंट्स के जरिए वह बच्चों से संबंधित बेहद आपत्तिजनक और अश्लील इलेक्ट्रॉनिक कंटेंट को धड़ल्ले से शेयर और सर्कुलेट कर रहा था। इस अवैध गतिविधि और पोर्नोग्राफी को फैलाने के बदले वह मोटी डिजिटल कमाई (Monetary Gain) भी कर रहा था।
पुख्ता चार्जशीट और कड़े ट्रायल के बाद मिली सजा
सीबीआई ने इस संवेदनशील मामले की गहनता से जांच करने के बाद 30 जून 2022 को अदालत में पहली मुख्य चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़ते हुए 7 दिसंबर 2022 को सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट भी कोर्ट के समक्ष पेश की गई। 20 अप्रैल 2023 को अदालत द्वारा आरोपी पर कड़े आरोप (Charges) तय किए गए थे। सीबीआई द्वारा पेश किए गए अकाट्य डिजिटल सबूतों और गवाहों के आधार पर विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को बिना किसी ढिलाई के दोषी मानते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया है।
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