ED की बड़ी कार्रवाई: ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से ₹155 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में करनाल, दिल्ली और गोवा के 11 ठिकानों पर छापेमारी
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 18 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के चंडीगढ़ जोनल यूनिट ऑफिस ने बैंकों के साथ करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में देश के कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह तलाशी अभियान मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत मैसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड (M/s Mahesh Timber Pvt Ltd) के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में चलाया गया है।
ED की टीमों ने 16 जून 2026 को इस कंपनी और इसके प्रमोटरों— अशोक मित्तल, सौरभ ढींगरा, भारत भूषण मित्तल, रमन सिंघल व अन्य से जुड़े करनाल, दिल्ली और गोवा स्थित 11 ठिकानों (परिसरों) पर एक साथ रेड की।
CBI की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी जांच
ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई सीबीआई (CBI), BSFB, नई दिल्ली द्वारा मैसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, इसके निदेशकों (डायरेक्टर्स) और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज की गई एफआईआर को आधार बनाकर शुरू की थी।
यह पूरा मामला ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) और कंसोर्टियम के अन्य बैंकों को करीब 155.21 करोड़ रुपये का चूना लगाने (wrongful loss) से जुड़ा हुआ है। आरोपियों ने फिनाकल (Finacle) सॉफ्टवेयर में बिना किसी वैध एंट्री के, अनधिकृत रूप से फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट (FLCs) में धोखाधड़ी से बढ़ोतरी करवाई थी।
बिना लकड़ी मंगाए सिंगापुर ट्रांसफर किए ₹195.02 करोड़; कस्टम जांच में पकड़े गए फर्जी कागजात
ED की प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कंपनी ने भारत और सिंगापुर में मौजूद अपनी सहयोगी संस्थाओं और कुछ लोगों के साथ मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची।
फर्जी FLCs का खेल: आरोपियों ने बिना किसी वास्तविक लकड़ी (timber) का आयात किए, केवल हेरफेर की गई FLCs के सहारे लगभग 195.02 करोड़ रुपये का फंड अवैध रूप से विदेशों में ट्रांसफर कर दिया।
कस्टम विभाग का खुलासा: सीमा शुल्क (Customs) अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन में यह पूरी तरह साफ हो गया कि बैंकों में जमा किए गए बड़ी संख्या में 'विधेयक प्रविष्टि' (Bills of Entry) और 'लाडिंग विधेयक' (Bills of Lading) पूरी तरह से जाली, मनगढ़ंत और फर्जी (forged and fabricated) थे।
शेल कंपनियों का नेक्सस (गठजोड़): सिंगापुर से भारत तक फैला जाल
ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच में सामने आया है कि सिंगापुर से भारत में लकड़ी के फर्जी आयात का एक काल्पनिक भ्रम (mirage) पैदा करने के लिए कंपनियों का एक बड़ा गठजोड़ तैयार किया गया था। इस नेक्सस के जरिए ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) से धोखाधड़ी कर बढ़ी हुई वैल्यू के FLCs खुलवाए गए और फंड्स सिंगापुर ट्रांसफर किए गए। इस पूरे खेल में जिन शेल कंपनियों व शिपिंग फर्मों का इस्तेमाल किया गया, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
मैसर्स अमेज़न एक्सपोर्ट्स पीटीई लिमिटेड (सिंगापुर), मैसर्स महेश टिम्बर सिंगापुर पीटीई लिमिटेड, मैसर्स ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स बीवीएम शिपिंग पीटीई लिमिटेड और मैसर्स पर्ल मैरीटाइम पीटीई लिमिटेड।
अशोक मित्तल और रमन सिंघल की मुख्य भूमिका; सौरव ढींगरा के घर से मिली सेल डीड
ED की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे घोटाले में अशोक कुमार मित्तल, रमन सिंघल और दीपक सिंगला की भूमिका बेहद प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई है। ये लोग संबंधित अवधि के दौरान इन सभी फ्रॉड कंपनियों (मैसर्स महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स महेश रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स अमेज़न एक्सपोर्ट्स पीटीई लिमिटेड आदि) में निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर काबिज थे। इन्होंने बिना किसी वास्तविक आयात के फर्जी लेनदेन (sham transactions) दिखाए। इसके अलावा, अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को रूट करने और उसकी लेयरिंग करने में सौरभ ढींगरा और भारत भूषण मित्तल का पूरा सहयोग मिला।
बरामदगी और आगे की कार्रवाई: छापेमारी की इस कार्रवाई के दौरान ED ने आरोपी सौरभ ढींगरा के परिसर से सेल डीड एग्रीमेंट्स (Sale Deed Agreements) बरामद किए हैं। इसके साथ ही, कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (Devices) भी PMLA के तहत ज़ब्त किए गए हैं। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को धोखा देकर जो 'Proceeds of Crime' जनरेट की गई थी, उसका पता लगाने के लिए आगे की जांच लगातार जारी है।
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