10/04/26

दिल्ली: 'फेक लोन ऐप' गिरोह के दो और गुर्गे गिरफ्तार, ठगी के पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलता था सिंडिकेट

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की साउथ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने 'ऑपरेशन साय-हॉक 4.0' (Operation CyHawk 4.0) के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फेक लोन ऐप के जरिए उगाही करने वाले गिरोह के दो और सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों से जुड़े हुए हैं, जिनका इस्तेमाल पीड़ितों को धमकाने और ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।



मोर्फ्ड फोटो के जरिए उगाही का गंदा खेल


यह गिरोह 'फेक लोन ऐप' के माध्यम से मासूम लोगों को बिना किसी गारंटी के लोन देने का लालच देता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इन ऐप्स से लोन लेता, उसके मोबाइल का पूरा एक्सेस (संपर्क और गैलरी) गिरोह के पास पहुंच जाता था। इसके बाद, लोन की किस्त वसूलने के नाम पर पीड़ितों की तस्वीरों को आपत्तिजनक (Morphed) बनाकर उन्हें और उनके परिवार को भेजने की धमकी दी जाती थी। इस डर के जरिए गिरोह लोगों से लाखों रुपये की उगाही कर रहा था।



पाकिस्तान और बांग्लादेश के नंबरों का इस्तेमाल


गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान करण कुमार (24) और शमी अहमद (27) के रूप में हुई है, जो दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके के रहने वाले हैं। पुलिस को इनके पास से दो मोबाइल फोन मिले हैं, जिनमें बेहद चौंकाने वाली वॉट्सऐप चैट बरामद हुई हैं। ये आरोपी पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करने वाले विदेशी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। इन विदेशी नंबरों के जरिए ही ठगी की पूरी प्लानिंग, क्यूआर कोड शेयरिंग और पैसों का प्रबंधन किया जाता था।



बैंक खातों से क्रिप्टोकरेंसी (USDT) तक का सफर


जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी करण कुमार ने कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता शमी अहमद को दिया था, जिसने आगे इसे गिरोह के मुख्य सदस्यों तक पहुँचाया। ठगी की रकम को सबसे पहले 'म्यूल अकाउंट्स' (किराए के बैंक खातों) में मंगाया जाता था। इसके बाद पुलिस और कानून से बचने के लिए उस पैसे को तुरंत नकद निकालकर क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदल दिया जाता था, जिससे पैसों के लेन-देन का सुराग मिटाया जा सके।


कौन हैं ये आरोपी?


पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी 'रैपिडो' (Rapido) ड्राइवर के रूप में काम करते थे।

करण कुमार: कापसहेड़ा का रहने वाला है और शमी अहमद के जरिए इस गिरोह में शामिल हुआ।


शमी अहमद: इसकी मुलाकात अपने भाई की मोबाइल शॉप पर राहुल नाम के एक व्यक्ति से हुई थी, जिसने इसे कमीशन के बदले बैंक खाते अरेंज करने के काम में लगाया था।


अब तक 6 गिरफ्तार, जांच जारी


दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि इस ऑपरेशन में अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के नंबरों का इस्तेमाल करने वाले मास्टरमाइंड वास्तव में वहीं बैठे हैं या भारत में ही कोई इन नंबरों को ऑपरेट कर रहा है।




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