दिल्ली अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़: अमेरिका भेजी जा रही थी लाखों की नशीली दवाएं
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (अन्नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (AGS) ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह सिंडिकेट कूरियर सेवाओं के जरिए अमेरिका और अन्य विदेशी देशों में 'एनआरएक्स' (NRX) और साइकोट्रोपिक दवाओं (जैसे ज़ोलपिडेम, ट्रामाडोल और डायजेपाम) की अवैध तस्करी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद की हैं।
ऐसे हुआ खुलासा
24 सितंबर 2025 को क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि एक गिरोह फर्जी दस्तावेजों और सामान की आड़ में कूरियर के जरिए नशीली दवाएं विदेशों में भेज रहा है। मोती नगर के रामा रोड स्थित कूरियर वेयरहाउस पर की गई छापेमारी में एक संदिग्ध पार्सल पकड़ा गया। इसमें नशीली दवाएं 'फैंसी लेस' और 'कॉटन' के सामान के नाम पर छिपाई गई थीं। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि दवाओं के स्ट्रिप्स पर बैच नंबर भी मिटा दिए गए थे ताकि उनकी पहचान न हो सके।
गिरोह का 'मास्टरमाइंड' और कार्यप्रणाली
पुलिस ने मुख्य आरोपी और गिरोह के सरगना यासिर खान सहित अभिषेक भार्गव, नितिन, नीरज राघव और अमितेश राय को गिरफ्तार किया है।
सरगना यासिर खान: वह अपनी फर्म 'जयबार सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' के बैंक खातों के जरिए भुगतान लेता था। यासिर पहले भी लखनऊ में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में शामिल रह चुका है।
फर्जीवाड़ा: आरोपी दवाओं को फर्जी बिलों के जरिए फार्मास्युटिकल चैनलों से खरीदते थे और कूरियर भेजने के लिए जाली केवाईसी (KYC) दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे।
डिजिटल नेटवर्क: आरोपी विदेशी ग्राहकों से व्हाट्सएप के जरिए जुड़े थे और पैसे का लेनदेन बैंक/यूपीआई के जरिए करते थे।
भारी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद
पुलिस ने छापेमारी के दौरान ज़ोलपिडेम, ट्रामाडोल और डायजेपाम की हजारों गोलियां बरामद कीं। आरोपियों के पास से बरामद दस्तावेजों और डिजिटल चैट से एक व्यवस्थित नेटवर्क का पता चला, जिसमें दवा की खरीद से लेकर उसे पैक करने और कूरियर के जरिए विदेश भेजने तक की पूरी कड़ियां शामिल थीं।
आरोपियों की भूमिका
अभिषेक भार्गव: पार्सल तैयार करना और फर्जी केवाईसी का इंतजाम करना।
नितिन (गणपति फार्मा): दवाओं की आपूर्ति और फर्जी इनवॉइस बनाना।
नीरज राघव: यासिर और नितिन के बीच समन्वय करना।
अमितेश राय (मां गायत्री फार्मा): नकद और फर्जी बिलों के जरिए दवाओं की खरीद और आपूर्ति।
क्राइम ब्रांच के डीसीपी हर्ष इंदोरा ने बताया कि इस सिंडिकेट के पकड़े जाने से ड्रग तस्करी की एक बड़ी चेन टूटी है। पुलिस अब उन विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है जिन्हें ये दवाएं भेजी जा रही थीं।
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