डीएवी पीजी कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला: ईडी ने कोर्ट में पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
देहरादून, 6 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED), देहरादून ने उत्तराखंड के बहुचर्चित डीएवी (पीजी) कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला प्रकरण में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक बड़ी कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज (HKHo4OLa8AAEplo.jpg) के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने इस घोटाले के मुख्य आरोपी श्री पीयूष चंद्र भटनागर एवं श्रीमती रंजना रावत के विरुद्ध पीएमएलए के कड़े प्रावधानों के तहत तैयार किया गया 'अभियोजन परिवाद' (Prosecution Complaint/चार्जशीट) माननीय विशेष PMLA न्यायालय, देहरादून के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। यह चार्जशीट 29 मई 2026 को दाखिल की गई।
उत्तराखंड पुलिस की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे घोटाले की नींव उत्तराखंड पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) और उसके बाद अदालत में पेश किए गए आरोप-पत्र के आधार पर टिकी है।
पुलिस चार्जशीट में आरोप था कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत की गई छात्रवृत्ति (वजीफा) की राशि को आरोपियों ने षड्यंत्र रचकर कॉलेज के आधिकारिक खातों के बजाय देना बैंक की एक शाखा में खोले गए एक अनधिकृत (फर्जी) बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया और उसका गबन कर लिया।
कॉलेज के नाम में कूटरचना कर खोला फर्जी बैंक खाता, ₹2.27 करोड़ केवल ब्याज कमाया
ईडी की पीएमएलए जांच में जो तथ्य और तौर-तरीके (Modus Operandi) सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:
नाम में हेराफेरी: डीएवी (पीजी) कॉलेज की प्रबंध समिति द्वारा देना बैंक की 'लक्ष्मी रोड शाखा' में खाता खोलने की मंजूरी दी गई थी। लेकिन कॉलेज के तत्कालीन छात्रवृत्ति प्रभारी/सहायक लिपिक श्री पीयूष चंद्र भटनागर और उनके सहयोगियों ने कॉलेज के नाम में कूटरचना (Forging) कर देना बैंक की 'जीएमएस रोड शाखा' में एक अनधिकृत खाता खोल डाला।
ब्याज की मोटी कमाई: वर्ष 2009 से 2014 की अवधि के दौरान इस फर्जी खाते में करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति निधि को अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि इस अवधि के दौरान उक्त अनधिकृत खाते में जमा धनराशि से आरोपियों ने लगभग ₹2.27 करोड़ की अतिरिक्त ब्याज आय भी अर्जित कर ली, जिसे डकार लिया गया।
बीमा प्रीमियम, नकद निकासी और निजी बैंक खातों में किया पैसे का ट्रांसफर
ईडी की जांच के अनुसार, छात्रवृत्ति प्रभारी से पदोन्नत होकर कार्यालय अधीक्षक बने पीयूष चंद्र भटनागर इस अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) के सृजन, छिपाव और उसके निजी उपयोग में मुख्य भूमिका निभा रहे थे:
इस अनधिकृत खाते में से ₹42.50 लाख की रकम नगद (Cash) निकाली गई।
₹66.50 लाख की राशि विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट (धनादेश) जारी करवाकर निकाली गई।
₹99.43 लाख की भारी-भरकम राशि पीयूष चंद्र भटनागर के विभिन्न व्यक्तिगत (पर्सनल) बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
इस गबन के पैसे का उपयोग पीयूष चंद्र और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जीवन बीमा पॉलिसियों (Insurance Premiums) के भुगतान, नगद निकासी और अन्य व्यक्तिगत विलासिताओं के लिए किया गया।
साइनिंग अथॉरिटी रंजना रावत ने निभाई घोटाले को सुगम बनाने की भूमिका
प्रेस रिलीज के मुताबिक, छात्रवृत्ति समन्वयक (Scholarship Coordinator) के रूप में कार्यरत और कॉलेज के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) श्रीमती रंजना रावत ने इस वित्तीय अपराध को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रंजना रावत ने यह भली-भांति जानते हुए भी कि देना बैंक का यह खाता अनधिकृत है, उस पर कई रिक्त (ब्लैंक) चेक और धन हस्तांतरण दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर किए। इन्हीं हस्ताक्षरित दस्तावेजों के माध्यम से करोड़ों रुपये का अनधिकृत वित्तीय लेनदेन किया गया और विभिन्न लाभार्थियों के जरिए अपराध की कमाई को रोटेट (परतबद्ध) किया गया।
स्कूटी और अचल संपत्तियां जब्त, अनंतिम कुर्की को मंजूरी
जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में पैसे के ट्रेल को ट्रैक करते हुए पाया कि अपराध की कमाई का एक हिस्सा पीयूष चंद्र भटनागर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों, बैंक जमा राशियों और एक होंडा एक्टिवा एच-स्मार्ट (125 सीसी) वाहन के रूप में चल संपत्तियों में परिवर्तित किया जा चुका था। इसके बाद ईडी ने कार्रवाई करते हुए 27 मई 2026 को एक अनंतिम कुर्की आदेश (Provisional Attachment Order) जारी कर ₹7.86 लाख मूल्य की इन चल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क (जब्त) कर लिया था।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि बैंक दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के पुख्ता डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह चार्जशीट दाखिल की गई है और न्यायालय में आरोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए एजेंसी प्रतिबद्ध है।
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