बैंक धोखाधड़ी मामला: 15 साल से फरार चल रहे घोषित अपराधी पी. अरोकियासामी को सीबीआई ने दबोचा
नई दिल्ली/चेन्नई , 6 जून (अन्नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बैंक धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। सीबीआई ने पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से कानून की नजरों से बचकर फरार चल रहे एक शातिर घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के सूचना अनुभाग द्वारा आज यानी 6 जून 2026 को जारी की गई आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, एजेंसी ने बैंक को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले मुख्य आरोपियों में से एक पी. अरोकियासामी (P. Arokiasamy) को 4 जून 2026 को एक विशेष ऑपरेशन के तहत दबोच लिया है।
केंचुआ खाद और डेयरी फार्मिंग के नाम पर लिया था ₹2.01 करोड़ का फर्जी लोन
सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत 21 जनवरी 2010 को दर्ज की गई एक शिकायत के आधार पर हुई थी। आरोप था कि मैसर्स सन बायो मैन्योर प्राइवेट लिमिटेड (M/s. Sun Bio Manure Pvt. Ltd., Chennai) के निदेशकों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया था।
कंपनी के निदेशकों ने तमिलनाडु के सलेम जिले में स्थित 'इंडियन बैंक' की वीरापांडी शाखा (Indian Bank, Veerapandi Branch, Salem District) से केंचुआ खाद (Vermi Culture) और डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) की गतिविधियों को शुरू करने के नाम पर ₹201.63 लाख (₹2.01 करोड़) का लोन मंजूर करवाया था। इस लोन को लेने के लिए आरोपियों ने कुछ संपत्तियों (Properties) के दस्तावेज बैंक के पास गिरवी (Mortgage) रखे थे, जबकि जांच में सामने आया कि आरोपी उन संपत्तियों के वास्तविक मालिक थे ही नहीं। इस तरह जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक के साथ ₹2.01 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।
अदालत ने 2011 में ही घोषित कर दिया था भगोड़ा, फर्जी निकला था पता
मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने मैसर्स सन बायो मैन्योर प्राइवेट लिमिटेड, इसके निदेशकों एस. शक्तिवेल, एस. विजयाकुमारी, पी. अरोकियासामी और तत्कालीन इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक (Branch Manager) एस. बालासुब्रमण्यम सहित अन्य निजी व्यक्तियों के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
इस मुख्य मामले की कानूनी सुनवाई के बाद अन्य दोषियों को कोर्ट से सजा भी मिल चुकी है, लेकिन आरोपी पी. अरोकियासामी केस दर्ज होने के समय से ही (पिछले 15 साल से) लगातार फरार चल रहा था। उसने बैंक रिकॉर्ड और जांच एजेंसी को जो अपना पता (Address) दिया था, वह भी पूरी तरह फर्जी और गलत पाया गया था। उसकी गिरफ्तारी न होने के कारण अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया था और वर्ष 2011 में कोयंबटूर स्थित माननीय द्वितीय अतिरिक्त सीबीआई मामलों की अदालत (Hon'ble II Additional Court of CBI cases, Coimbatore) ने उसे आधिकारिक तौर पर 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) करार दिया था।
सीबीआई के निरंतर प्रयासों से दबोचा गया आरोपी, 19 जून तक जेल भेजा
प्रेस रिलीज के मुताबिक, कानून के शिकंजे से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहे इस भगोड़े को पकड़ने के लिए सीबीआई की टीम पिछले लंबे समय से टेक्निकल इनपुट्स और ग्राउंड स्तर पर काम कर रही थी। आखिरकार, एजेंसी के निरंतर, सूक्ष्म और अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप 4 जून 2026 को पी. अरोकियासामी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सक्षम न्यायालय (Competent Court) के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पी. अरोकियासामी को 19 जून 2026 तक के लिए न्यायिक हिरासत (Judicial Remand) में जेल भेज दिया है।
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