उत्तर पूर्वी राज्यों के कारीगर और बुनकर समूह ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

आरएस अनेजा, 20 मई नई दिल्ली - पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों और बुनकरों के एक समूह ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

कारीगरों और बुनकरों ने 'एट होम' रिसेप्शन के दौरान निमंत्रण किट तैयार करने और भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र की विविध कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उदाहरण के लिए, नागालैंड के कारीगरों ने केले के रेशे और बांस का उपयोग करके टोकरियां बनाईं, असम के बुनकरों ने शॉल बनाए। मणिपुर के कारीगरों ने काली मिट्टी के बर्तन बनाए और सिक्किम के कारीगरों ने प्राकृतिक रेशों का उपयोग करके उत्पाद तैयार किए।

इस संवाद के दौरान, कारीगरों और बुनकरों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित 'एट होम' रिसेप्शन के लिए काम करने के अपने अनुभव साझा किए और अपनी प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया।

असम, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के कारीगरों और बुनकरों से परस्‍पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में प्राकृतिक सुंदरता का भंडार है। उन्होंने कारीगरों और बुनकरों को सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उनका कलात्मक ज्ञान अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए कारीगरों और बुनकरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्र की जीवंत विरासत का ज्वलंत उदाहरण हैं और उनसे आग्रह किया कि वे इन अमूल्य परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएं।

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