साझा विकास की नई राह: मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच औद्योगिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मिली नई ऊर्जा
एन.एस.बाछल, 22 मार्च, भोपाल
जयपुर में आयोजित 'इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रगाढ़ रिश्तों को 'जुड़वा भाइयों' जैसी संज्ञा दी। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों प्रदेश न केवल सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप से एक-दूसरे के करीब हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी स्वाभाविक साझीदार हैं। राजस्थान की टेक्सटाइल व ज्वेलरी विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश की कपास उत्पादन क्षमता व विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र मिलकर एक मजबूत वैश्विक मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर सकते हैं। डॉ. यादव ने हाल ही में संपन्न राजस्थान स्थापना दिवस और गणगौर पर्व की शुभकामनाएं देते हुए दोनों राज्यों के बीच 'रोटी-बेटी' के पारंपरिक संबंधों के साथ-साथ अब 'पानी के संबंधों' के सूत्रपात होने की बात भी कही।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना को दोनों राज्यों के लिए ऐतिहासिक बताया। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की इस महापरियोजना का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि दोनों राज्यों को मात्र पांच-पांच प्रतिशत राशि देनी होगी। इस योजना के क्रियान्वयन से सूखे क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी और सिंचाई व पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। डॉ. यादव ने राजस्थान के व्यापारियों की युक्ति-बुद्धि और संघर्षशीलता की सराहना करते हुए कहा कि उनके पास न केवल धन कमाने का कौशल है, बल्कि वे दुनिया भर में अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश में नियमों के सरलीकरण और सुगम व्यापार के लिए आमंत्रित किया।
मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 26 विभिन्न क्षेत्रों के लिए नई नीतियां लागू हैं और जल्द ही एआई तथा स्पेस सेक्टर के लिए भी विशेष पॉलिसी लाई जाएगी। मध्यप्रदेश अब एक बिजली सरप्लस राज्य बन चुका है और दिल्ली मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी यहाँ की बिजली से संचालित हो रहे हैं। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म, माइनिंग और दुग्ध उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार पीपीपी मॉडल के तहत मात्र एक रुपये की लीज पर जमीन उपलब्ध करा रही है और गौ-वंश संरक्षण के लिए अनुदान राशि को भी दोगुना किया गया है।
निवेशकों को आकर्षित करते हुए डॉ. यादव ने बताया कि नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा में देश का पहला रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट जोन विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का 'सिंगल विंडो सिस्टम' और 'इन्वेस्ट एमपी 3.0' पोर्टल देश के बेहतरीन डिजिटल प्लेटफार्म्स में से एक है। सत्र के दौरान राजस्थान के प्रमुख उद्योगपतियों ने भी मध्यप्रदेश के सकारात्मक वातावरण और सस्ती बिजली की उपलब्धता की प्रशंसा की। इंसुलेशन एनर्जी जैसे समूहों ने राज्य में बड़े निवेश की पुष्टि की है, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कई दिग्गज उद्योगपतियों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की और उन्हें 'देश के दिल' मध्यप्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
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