विकसित भारत के निर्माण में युवाओं के लिए अधिक से अधिक अवसर: राज्यपाल मध्यप्रदेश

एन.एस.बाछल, 26 जून, भोपाल।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि क्षेत्र के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'इवांकार भारत@2047' के विचार को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं सहित सभी वर्गों से लगातार चर्चा कर रहे हैं। छात्रों में राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने में सक्रिय योगदान देना विश्वविद्यालयों का दायित्व है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल लोक भवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन और समन्वय से संबंधित विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विश्वविद्यालयों को पूर्व-सैनिकों के लिए हर दो साल में प्लेसमेंट कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की सलाह दी है। वर्तमान छात्रों को प्लेसमेंट कॉन्फ्रेंस में प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में योग के अभ्यास का उदाहरण देते हुए योग की सार्वभौमिक स्वीकार्यता का उल्लेख किया और कहा कि विश्वविद्यालयों को मासिक और साप्ताहिक रूप से योग की नियमित गतिविधियाँ शुरू करनी चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण पत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब और वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यावहारिक पहल बताया। कृषि से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए प्रमाणन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया गया।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद से विश्वविद्यालयों में भेजते हैं। इस भरोसे को बनाए रखना कुलपतियों और प्रोफेसरों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि छात्रों को ज्ञान और कौशल के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ना महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय के किसी गांव को गोद लेकर छात्रों को ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में शामिल करें। पिछड़े समुदायों और क्षेत्रों के विकास के लिए अभूतपूर्व योजना, पीएम-जनमान, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए भी छात्रों को प्रेरित करें। कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों को गांवों का दौरा कराएं। इससे प्राप्त अनुभव छात्रों को भविष्य में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन एक गंभीर अनियमितता है। कुलपति के वित्तीय निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के लिए साझा पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होना स्वैच्छिक है, लेकिन स्वचालित व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालय प्रवेश आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है।

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाही, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, लोक भवन और उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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