उत्तराखंड LUCC चिटफंड घोटाला: CBI की बड़ी कार्रवाई, 25 करोड़ की 23 संपत्तियां कुर्क; 1.6 लाख निवेशकों से ₹419 करोड़ की हुई थी ठगी
नई दिल्ली, 26 जून (अन्नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, उत्तराखंड के बहुचर्चित 'मैसर्स लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी' (LUCC) चिटफंड घोटाले में जांच एजेंसी को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सीबीआई ने इस धोखाधड़ी मामले के आरोपियों पर कड़ा शिकंजा कसते हुए उनकी करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य की 23 संपत्तियों को कुर्क (Attachment) करने की कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। कुर्क की गई ये संपत्तियां उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मुंबई में स्थित हैं।
तीन राज्यों में फैली संपत्तियों पर चला चाबुक
सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड धोखाधड़ी मामले की गहन जांच के दौरान उन संपत्तियों की पहचान की गई थी, जिन्हें आरोपियों ने निवेशकों से ठगे गए पैसों के जरिए हासिल किया था। इसके बाद अलग-अलग सक्षम प्राधिकरणों से अनुमति लेकर इन्हें अटैच किया गया:
उत्तराखंड: राज्य के 'बड्स एक्ट' (BUDS Act) के तहत सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से उत्तराखंड में स्थित 06 संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश जारी कराए गए।
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की नामित 'बड्स एक्ट' अदालत से मंजूरी मिलने के बाद वहां स्थित 16 संपत्तियों को कुर्क किया गया है।
मुंबई: महाराष्ट्र में नामित 'बड्स एक्ट' कोर्ट की अनुमति से मुंबई स्थित 01 संपत्ति को भी अटैच करने की मंजूरी दी गई है, जिसके आदेश उत्तराखंड के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए जा रहे हैं।
एजेंसी का कहना है कि इस घोटाले से जुड़ी अन्य बची हुई संपत्तियों की पहचान करने के प्रयास भी लगातार जारी हैं।
1.6 लाख से अधिक निवेशकों से ₹419 करोड़ की महा-ठगी
इस घोटाले का बैकग्राउंड बेहद चौंकाने वाला है। साल 2025 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Hon'ble High Court of Uttrakhand) के आदेशों के बाद सीबीआई ने उत्तराखंड राज्य पुलिस से कई एफआईआर (FIRs) अपने हाथ में लेकर इस मामले को दर्ज किया था। यह मामला आईपीसी (IPC), बीएनएस (BNS), बड्स एक्ट (BUDS Act) और यूपीआईडी एक्ट (UPID Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है।
आरोपियों ने आकर्षक रिटर्न का लालच देकर देश भर के 1.6 लाख से अधिक जमाकर्ताओं (Investors) को अपने जाल में फंसाया और उनके खून-पसीने की गाढ़ी कमाई के करीब 419 करोड़ रुपये का गबन कर इस महा-घोटाले को अंजाम दिया।
7 मुख्य आरोपी जेल में, जांच अब भी जारी
सीबीआई ने इस ठगी नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए अब तक मामले से जुड़े 07 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) के तहत जेल की सलाखों के पीछे हैं। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की कड़ियों को जोड़ने और अन्य वित्तीय संपत्तियों का पता लगाने के लिए आगे की तफ्तीश निरंतर जारी है।
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