डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर 10.6 करोड़ की ठगी: दिल्ली पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर गैंग का किया खात्मा, 6 राज्यों में छापेमारी
नई दिल्ली, 26 मार्च (अन्नू): दिल्ली पुलिस के आउटर-नॉर्थ जिले की साइबर सेल ने देश के कई राज्यों में फैले एक ऐसे शातिर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो 'डिजिटल अरेस्ट', नकली आईपीओ (IPO) और ट्रेडिंग के नाम पर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस की इस व्यापक कार्रवाई में 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और करीब 10.6 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस गैंग के खिलाफ देशभर में कुल 89 शिकायतें दर्ज थीं।
6 राज्यों में चली पुलिस की 'स्पेशल स्ट्राइक'
संयुक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी रेंज) विजय सिंह और डीसीपी हरेश्वर स्वामी के नेतृत्व में गठित टीम ने इस गिरोह को दबोचने के लिए झारखंड (रांची), उत्तराखंड (रुड़की/देहरादून), मध्य प्रदेश (भोपाल), राजस्थान (कोटा), दिल्ली और उत्तर प्रदेश (गाजियाबाद) में ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर उन 'म्यूल अकाउंट्स' (धोखाधड़ी के पैसे के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) का पता लगाया, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी।
केस स्टडी: कैसे फैलाया ठगी का जाल?
पुलिस ने चार मुख्य एफआईआर (FIR) पर कार्रवाई करते हुए इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली का खुलासा किया है:
डिजिटल अरेस्ट (केस 1 व 4): एक बुजुर्ग दंपत्ति को TRAI और CBI अधिकारी बनकर डराया गया और करीब एक हफ्ते तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखकर 20 लाख रुपये ठग लिए गए। एक अन्य मामले में सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल का डर दिखाकर 8 लाख रुपये ऐंठे गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 19 लाख रुपये बरामद कर कोर्ट के जरिए पीड़ितों को वापस दिलाए हैं।
फेक आईपीओ और ट्रेडिंग (केस 2 व 3): व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी 'PM HDFC' जैसे ऐप्स के जरिए लोगों को शेयर बाजार और आईपीओ में भारी मुनाफे का लालच दिया गया। आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी डैशबोर्ड दिखाए जिससे उन्हें लाभ होने का यकीन हो जाए, लेकिन अंत में पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस ने रांची से शशिकांत कुमार, रुड़की से खालिद त्यागी, दिल्ली के शाहदरा से सचिन मित्तल और नितिन सैनी, गाजियाबाद से आसिफ और चंडीगढ़ निवासी वीरेंद्र मुखिया को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने, तकनीक संभालने और ठगी की राशि को इधर-उधर करने (लेयरिंग) का काम करते थे। इनमें से कुछ आरोपी गिरफ्तारी के डर से विदेश भागने की फिराक में थे, जिन्हें पुलिस ने मुस्तैदी से दबोच लिया।
जनता के लिए पुलिस की एडवाइजरी
डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने आम जनता से अपील की है कि पुलिस, सीबीआई या ट्राई जैसी एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल के जरिए 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करतीं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अंजान निवेश स्कीम पर भरोसा न करें और डराने या दबाव बनाने वाली कॉल्स से न घबराएं। किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।
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