भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना से जबुआ के प्रेम गम बने आत्मनिर्भर : मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 04 जून, भोपाल।
जीवन में सफलता केवल संसाधनों की प्रचुरता से ही नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से भी प्राप्त होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखे और निरंतर प्रयास करता रहे, तो परिस्थितियाँ भी उसके मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं। झाबुआ निवासी प्रेम गमर के पिता श्री मंजेश गमर की कहानी भी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक है, जिन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है।
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, प्रेम गामर ने निजी क्षेत्र में काम करना शुरू किया। वे अपनी नौकरी से जीविका चला रहे थे, लेकिन उनका सपना था कि वे अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करें और कुछ नया करें। वे ऐसा काम करना चाहते थे जिससे उन्हें आत्मसंतुष्टि के साथ-साथ समाज के लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने का अवसर मिले। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लोगों की रुचि और तकनीकी समझ को देखते हुए, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स बिक्री और सेवा के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने का निर्णय लिया, लेकिन व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।
14.40 लाख रुपये के ऋण से कारोबार शुरू किया था, अब हर महीने लगभग 1.50 लाख रुपये की कमाई हो रही है।
प्रेम गमर ने जिला जनजातीय वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ कार्यालय से संपर्क किया और "भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना" के संबंध में मार्गदर्शन मांगा। सांसद ने निगम के माध्यम से उनका ऋण आवेदन तैयार किया और इसे ऑनलाइन माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा, झाबुआ शाखा को भेजा।
बैंक द्वारा मामले की जांच के बाद, प्रेम गामर को 14.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण प्राप्त करने के बाद, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स बिक्री और सेवा का व्यवसाय शुरू किया और पूरी लगन और मेहनत से अपना काम जारी रखा। आज उन्होंने व्यापार जगत में अच्छी प्रतिष्ठा हासिल कर ली है और लगभग 1.50 लाख रुपये प्रति माह की आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने अपनी इकाई में एक अन्य व्यक्ति को रोजगार भी प्रदान किया है।
रोज़गार की समस्या से रोज़गारडेटा बने तक,प्रेम ने दी प्रेरणा का युवाओं को संदेश
प्रेम गमर कहते हैं कि एक समय था जब वे स्वरोजगार की तलाश में भटकते रहे, लेकिन आज वे अपना सफल व्यवसाय चलाकर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय मध्य प्रदेश जनजातीय वित्त एवं विकास निगम और भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना को देते हैं। उनका कहना है कि सरकार की ये योजनाएं युवाओं के लिए सुनहरा अवसर हैं। सही ज्ञान, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कोई भी युवा स्वरोजगार के माध्यम से अपनी पहचान बना सकता है। आज श्री प्रेम गमर की सफलता जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है जो स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहे हैं।
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