मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश ने कहा कि राज्य में कोई भी युवा उच्च शिक्षा से वंचित नहीं है।

एन.एस.बाछल, 04 जून, भोपाल।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कौशल विकास और रोजगार से भी जुड़ी होनी चाहिए। यह राज्य सरकार की प्राथमिकता है और राज्य में नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा को रोजगार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और नवाचार से जोड़ा जा रहा है। क्षेत्र के कॉलेजों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, फिनटेक, डेटा साइंस, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य आधुनिक विषयों की पढ़ाई हो रही है। सरकारी कॉलेजों में कृषि को एक विषय के रूप में जोड़ा गया है और स्कूलों में प्रायोगिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में युवाओं को विश्व स्तरीय उन्नत प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण मिल रहा है। राज्य में 'सीखो, कमाओ' योजना भी चल रही है, जिसके माध्यम से युवा उद्योग से सीधे सीख और कमा रहे हैं। क्षेत्र के कई युवा स्टार्टअप चला रहे हैं।

विद्यार्थी हितैषी शिक्षा पर जोर

राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि क्षेत्र का कोई भी युवा उच्च शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक छात्र अपनी प्रतिभा के अनुसार प्रगति करे। पूरे क्षेत्र में 31 मई से "कॉलेज चलो अभियान" शुरू किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा 12वीं के बाद कोई भी प्रतिभाशाली छात्र अवसरों की कमी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। किसी भी छात्र की आर्थिक स्थिति उसकी शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसलिए, छात्रवृत्ति, शुल्क सहायता, छात्रावास, परिवहन और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से छात्रों, विशेष रूप से लड़कियों और वंचित वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और समान अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने और वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई 'गांव की बेटी' और 'प्रतिभा किरण' योजनाओं ने बहुत सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। इन दोनों योजनाओं के तहत, छात्राओं को 10 महीनों के लिए प्रति शैक्षणिक सत्र कुल 500 रुपये यानी 500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। राज्य सरकार शिक्षा को पूरी तरह से 'छात्र हितैषी' बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना ​​है कि "कॉलेज चलो अभियान" महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य, आत्मनिर्भर भारत और विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प है। राज्य सरकार उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं के विकास और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार का लक्ष्य न केवल नामांकन बढ़ाना है, बल्कि प्रत्येक छात्र को बेहतर शिक्षा, आधुनिक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना भी है। राज्य में लागू की गई नई शिक्षा नीति के माध्यम से छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।

उद्योग से संबंधित अध्ययन को प्राथमिकता दी जाती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में, इस क्षेत्र को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए कार्य प्रगति पर है। विश्व स्तरीय संस्थान, आधुनिक सुविधाएं और कौशल विकास कार्यक्रम इस क्षेत्र में लगातार विस्तारित हो रहे हैं। अकादमिक ऋण बैंक, कौशल आधारित शिक्षा, इंटर्नशिप, उद्योग संबंधी अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता दी जा रही है। बहु-प्रवेश और निकास प्रणाली के साथ शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया गया है। राज्य सरकार ज्ञान, कौशल और नवाचार की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार का प्रयास इस क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना है।

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