CBI की बड़ी कामयाबी: 2002 के गढ़वा किला मूर्ति चोरी और मर्डर केस का आखिरी फरार आरोपी रामनारायण उर्फ हैदर गिरफ्तार

प्रयागराज, 6 जुलाई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, सीबीआई ने करीब 24 साल पुराने ऐतिहासिक गढ़वा किला डकैती, मर्डर और प्राचीन मूर्ति चोरी के मामले में सालों से फरार चल रहे आखिरी मुख्य आरोपी रामनारायण उर्फ हैदर को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। सीबीआई की विशेष टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के थाना खागा क्षेत्र के अंतर्गत आते गांव नसीरपुर से दबोचा है। इस शातिर आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल केस के सभी फरार नामजद आरोपी अब कानून के शिकंजे में आ चुके हैं।

गढ़वा किले में वॉचमैन की हत्या कर लूटी थी भगवान बुद्ध की मूर्ति

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह मामला साल 2002 का है, जब उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक गढ़वा किले में एक दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया गया था।

  • क्रूरता से मर्डर: 21 और 22 अप्रैल 2002 की दरमियानी रात आरोपी विजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में 11 बदमाशों के एक संगठित गिरोह ने किले पर धावा बोला था। डकैती के दौरान बदमाशों ने वहां तैनात सुरक्षाकर्मी (वॉचमैन) विनोद कुमार श्रीवास्तव के साथ बुरी तरह मारपीट की और उसका मुंह बंद कर (Gagged) बेरहमी से उसकी हत्या कर दी थी।

  • लूटपाट और तोड़फोड़: गिरोह ने दूसरे वॉचमैन को भी बंधक बना लिया और स्टोर रूम का ताला तोड़कर वहां रखी भगवान बुद्ध की बेहद कीमती और प्राचीन पाषाण (पत्थर) की मूर्ति चुरा ली थी। मूर्ति को निकालते समय वह दो टुकड़ों में टूट गई थी।

2.20 लाख में बेची थी मूर्ति, दिल्ली के रास्ते भेजी गई थी विदेश

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस थाना शंकरगढ़ ने क्राइम नंबर 43/2002 के तहत आईपीसी की धारा 396 और 201 के तहत दर्ज की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 सितंबर 2003 को इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

सीबीआई की तफ्तीश में खुलासा हुआ कि चोरी की गई प्राचीन मूर्ति के टुकड़ों को एक गाड़ी के जरिए ले जाया गया था और मुख्य आरोपी विजय कुमार शुक्ला ने इसे दो अन्य व्यक्तियों को 2.20 लाख रुपये में बेच दिया था। इसके बाद इस ऐतिहासिक मूर्ति को दिल्ली के महिपालपुर स्थित एक गोदाम में शिफ्ट किया गया और वहां से इसे अवैध रूप से विदेश (Smuggled Abroad) भेज दिया गया था।

CBI की चार्जशीट और फरार आरोपियों की धरपकड़

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, गहन जांच के बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर 2005 को इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें से चार मुख्य आरोपी विजय कुमार शुक्ला, रवि करण, सूरज भान और रामनारायण उर्फ हैदर लगातार फरार चल रहे थे।

इन फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए सीबीआई ने विशेष टीमों का गठन किया, जिन्होंने स्थानीय खुफिया तंत्र और सर्विलांस की मदद से लगातार पीछा किया:

  • सूरज भान और रवि करण: सीबीआई ने मुस्तैदी दिखाते हुए भगोड़े आरोपी सूरज भान को 22 मई 2026 और रवि करण को 2 जून 2026 को गिरफ्तार किया था।

  • विजय कुमार शुक्ला: मुख्य साजिशकर्ता विजय कुमार शुक्ला को उत्तर प्रदेश पुलिस ने किसी अन्य मामले में गिरफ्तार कर चित्रकूट जिला जेल में बंद कर रखा था। सीबीआई ने 16 जून 2026 को लखनऊ की सक्षम अदालत में अर्जी दाखिल कर उसे इस केस में पेश करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब सभी आरोपी भुगतेंगे किए की सजा

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, अब चौथे और आखिरी फरार आरोपी रामनारायण उर्फ हैदर की फतेहपुर से गिरफ्तारी के बाद इस जघन्य हत्याकांड और अंतरराष्ट्रीय मूर्ति तस्करी के सभी आरोपी ट्रैक किए जा चुके हैं। अब इन सभी के खिलाफ अदालत में कानून के मुताबिक सख्त ट्रायल चलाया जाएगा, ताकि मृतक वॉचमैन के परिवार को पूरा इंसाफ मिल सके।

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