29/03/26

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: घायल कांस्टेबल का मुआवजा 4.75 लाख से बढ़कर 14.05 लाख हुआ, बीमा कंपनी की अपील खारिज

अभिकान्त, 29 मार्च चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हरियाणा पुलिस के एक कांस्टेबल को बड़ी राहत दी है, जो वर्ष 2006 में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के 2012 के फैसले को संशोधित करते हुए मुआवजा राशि को 4.75 लाख रुपये से बढ़ाकर 14.05 लाख रुपये कर दिया है। अदालत ने इस दौरान एक मानवीय टिप्पणी भी की कि दुर्घटना के बाद सदमे और मानसिक पीड़ा से गुजर रहे व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह मुआवजे के दावे के लिए मेडिकल बिल इकट्ठा करने में सतर्क रहे।

जस्टिस ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी की उन दलीलों को खारिज कर दिया जिनमें कम बिल पेश करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा हो और गहरे सदमे में हो, तो उसका पूरा ध्यान केवल जीवन बचाने पर होता है, न कि भविष्य के दावों के लिए रसीदें सहेजने पर। कोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल ने पीड़ित की 'फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स' (भविष्य की संभावनाओं) और इलाज के दौरान हुई आय की हानि का सही आकलन नहीं किया था।

अदालत ने कांस्टेबल की मासिक आय और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की पुनर्गणना की। कोर्ट ने आदेश दिया कि बढ़ी हुई राशि पर याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने बीमा कंपनी की उस अपील को भी खारिज कर दिया जिसमें मुआवजे को कम करने की मांग की गई थी।

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