दवाओं की गुणवत्ता पर संकट: CDSCO की जांच में 141 दवाओं के सैंपल फेल, हिमाचल की 46 दवाएं शामिल
अभिकान्त, 22 अप्रैल नई दिल्ली : केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी मार्च 2026 के ताजा 'ड्रग अलर्ट' ने देश की फार्मा इंडस्ट्री और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। राष्ट्रव्यापी गुणवत्ता जांच के दौरान देश की 141 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं, जिन्हें आधिकारिक तौर पर 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (NSQ) घोषित किया गया है।
जांच में सबसे बड़ा झटका हिमाचल प्रदेश को लगा है। फेल हुए कुल सैंपल्स में से 46 दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअब, ऊना और सोलन जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में निर्मित हैं। हिमाचल को देश का फार्मा हब माना जाता है, जहाँ से देश की कुल दवाओं का लगभग एक-तिहाई उत्पादन होता है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में नमूनों का फेल होना निर्माण मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़ा करता है।
फेल हुए सैंपल्स में केवल सामान्य बीमारियां जैसे सिर दर्द, पेट दर्द, बीपी और शुगर की दवाएं ही नहीं, बल्कि कैंसर और हृदय रोग जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सॉल्ट भी शामिल हैं। इसके अलावा संक्रमण रोकने वाली एंटीबायोटिक्स और अल्सर की दवाओं के सैंपल भी निर्धारित कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
ड्रग कंट्रोलर जनरल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सभी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही, इन विशेष बैचों की दवाओं को बाजार से तुरंत वापस मंगवाने (Recall) के सख्त आदेश दिए गए हैं ताकि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि मरीज अपनी दवाओं के बैच नंबर की जांच कर लें और संदिग्ध गुणवत्ता वाली दवाओं का सेवन तुरंत बंद कर दें।
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