जब पानी घर पहुंचा तो कंधारी गांव की तस्वीर बदल दी गई थी : मध्यप्रदेश

एन.एस.बाछल, 16 मई, भोपाल।

कंधारी गांव में कभी-कभी घंटों पानी का इंतजार , हैंडपंपों पर लंबी कतारें और महिलाओं का पानी की तलाश में दूर-दूर तक भटकना आम बात थी। गर्मी के मौसम में गांव में पीने के पानी का संकट और भी बढ़ जाता था। कई परिवार अपना पूरा दिन पानी का इंतजाम करने में बिता देते थे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और महिलाओं की दिनचर्या बदल जाती थी। आज वही कंधारी गांव ग्रामीण जीवन में आए बदलाव का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां हर घर में शुद्ध पीने का पानी पहुंचने से लोगों के जीवन में सहजता, सम्मान और विश्वास का संचार हुआ है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, राज्य सरकार ग्रामीण बुनियादी ढांचे को जनजीवन से जोड़कर ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है , जिनका हमारे नागरिकों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित बसई समूह जल प्रदया योजना ने दतिया जिले के कंधारी गांव सहित क्षेत्र के कई गांवों में इस परिवर्तन को साकार किया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके के निरंतर मार्गदर्शन और नियमित निगरानी के कारण, योजना का लाभ निम्नतम वर्ग के परिवारों तक पहुंच रहा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि विभाग योजनाओं की गुणवत्ता और नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दे रहा है ताकि ग्रामीणों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन ने महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति को मजबूत किया है।

बसाई समूह जल आपूर्ति योजना लगभग 52.26 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई थी। इस योजना के माध्यम से दतिया और भंडर क्षेत्रों के 32 गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। योजना के लागू होने के बाद, कंधारी गांव में हर घर में नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित जल आपूर्ति शुरू हो गई , जिससे ग्रामीण जीवन का पूरा परिदृश्य बदल गया।

लगभग 352 परिवारों वाले कंधारी गांव में पीने के पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में हैंडपंपों की सीमित संख्या के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता था। पानी की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं थी , जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। पानी गांव के लोगों के लिए न केवल एक आवश्यकता थी, बल्कि एक दैनिक संघर्ष भी था।

इस योजना के शुरू होने के बाद गांव में एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला। घरों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले उनका अधिकांश समय पानी लाने में व्यतीत होता था , लेकिन अब वे परिवार और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय निकाल पाती हैं। बच्चों को भी आश्रय मिला है और उन्हें पढ़ाई के लिए समय मिल रहा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति में सुधार हुआ है और जलजनित बीमारियों में कमी आई है। यह बदलाव ग्रामीणों के जीवन स्तर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

कंधारी गांव की यह कहानी महज एक गांव की कहानी नहीं है , बल्कि बदलते मध्य प्रदेश की एक तस्वीर है, जहां विकास परियोजनाएं आंकड़ों से परे जाकर लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों तक पहुंचकर स्वच्छ पेयजल पहुंचाना अब ग्रामीण सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई पहचान बन गया है।

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