16/05/26

करोड़ों का लैंड ग्रैब घोटाला: ईडी ने तीन राज्यों में फैले आध्यात्मिक ट्रस्ट की संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने वाले दो मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली, 16 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने करोड़ों रुपए के एक बड़े जमीन हड़पने और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो मुख्य आरोपियों, जी. राम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर साल 1963 में पंजीकृत एक चैरिटेबल सोसाइटी 'द स्पिरिचुअल रीजनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया' (SRMF) की अचल संपत्तियों को धोखाधड़ी से बेचने और ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप है। नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।

तीन राज्यों में दर्ज एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 14 और 15 मई 2026 को की गई व्यापक छापेमारी के बाद अमल में लाई गई है। जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दर्ज कई प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर 7 मई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला (ECIR) दर्ज किया था। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी पहचान बनाने और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद ईडी ने इस अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।

फर्जी दस्तावेज और मुख्तारनामा (Power of Attorney) का खेल

जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने खुद को मूल ट्रस्ट (SRMF) का अधिकृत पदाधिकारी बताते हुए फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, जाली बोर्ड प्रस्ताव और नकली अथॉराइजेशन लेटर तैयार किए। इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे आरोपियों ने ट्रस्ट की सैकड़ों करोड़ रुपए की बेशकीमती जमीनों को अवैध तरीके से बेच दिया। जी. राम चंद्र मोहन इस पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता है, जिसने 2010 में खुद को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष घोषित किया और बाद में एक फर्जी पैन कार्ड बनवाकर बैंक खाते खोले ताकि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को इधर-उधर किया जा सके। उसके साथी आकाश मालवीय ने खुद को कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी सेल डीड पर हस्ताक्षर किए।

लक्जरी गाड़ियां जब्त और बैंक खाते फ्रीज

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस घोटाले में मेसर्स सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर प्रदीप सिंह की भी सक्रिय भूमिका सामने आई है। प्रदीप सिंह ने यह जानते हुए भी कि जमीन ट्रस्ट की है और आरोपियों के पास इसे बेचने का अधिकार नहीं है, धोखाधड़ी से सौदे किए और बाद में उस जमीन के कुछ हिस्सों को तीसरे पक्ष को बेच दिया। कार्रवाई के तहत ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत सिंहवाहिनी इंफ्रा और प्रदीप सिंह के बैंक खाते, एफडी, लॉकर और टोयोटा हाइब्रिड, लैंड रोवर डिफेंडर और महिंद्रा थार रॉक्स जैसी लक्जरी गाड़ियों को फ्रीज और जब्त कर लिया है।

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