मध्य प्रदेश कुटीर और ग्राम उद्योगों को नए आयाम देने की तैयारी कर रहा है।

एन.एस.बाछल, 16 मई, भोपाल।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार रोजगार, नवाचार और बाजारों से जोड़कर कुटीर एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र को नया स्वरूप देने जा रही है। आधुनिक सोच के साथ पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देने और ग्रामीण कारीगरों को बेहतर आय और पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में महेश्वरी, चंदेरी, खादी और रेशम जैसे मध्य प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों को न केवल संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि उनका विस्तार और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री का मुख्य निर्देश

हथकरघा क्लस्टरों का विस्तार: महेश्वरी और चंदेरी की सफलता को देखते हुए, क्षेत्र के अन्य जिलों में नए हथकरघा क्लस्टरों की पहचान की जाएगी और उन्हें विकसित किया जाएगा।

खादी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा: उत्तर प्रदेश में कपास मिल क्षेत्रों और पारंपरिक बुनाई क्षेत्रों को शामिल करके खादी उत्पादन के लिए एक नई योजना बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय रोजगार सृजित करना है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर: करघा एवं चरखा प्रदय योजना को महिला एवं बाल विकास एवं कृषि विभाग से जोड़ा जाएगा ताकि इसे रोजगारोन्मुखी बनाया जा सके। इसका उद्देश्य रेशम उत्पादन को लखपति दीदियों से जोड़ना है।

ब्रांड आउटलेट्स का विस्तार: मृगनयनी, कबीरा और विंध्यावली जैसे ब्रांड एम्पोरियम अब फ्रेंचाइजी मॉडल पर अन्य जिलों में खुलेंगे। पर्यटन निगम के सहयोग से प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आउटलेट्स स्थापित किए जाएंगे।

धार्मिक और सांस्कृतिक उत्पादों का प्रचार-प्रसार: धार्मिक स्थलों के लिए गुणवत्तापूर्ण पूजा सामग्री का उत्पादन और बिक्री अनुदान और बैंक ऋण आधारित योजनाओं से जुड़ी होगी।

नवाचार और युवा सहभागिता: उज्जैन, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में इंदौर की साड़ी वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। साड़ी पहनने को प्रोत्साहित करने के लिए एक पुरस्कार योजना भी शुरू की जाएगी।

रेशम और सिल्क टेक पार्क का विस्तार: ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में "प्राकृत" रेशम शोरूम खोले जाएंगे। पचमढ़ी सिल्क टेक पार्क की तर्ज पर रतपानी और अमरकंटक में भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

ग्राम उद्योग इकाइयों को लघु एवं मध्यम उद्यमों से जोड़ना: लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की उद्यम क्रांति योजना के तहत ग्राम उद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए लक्ष्य और आवंटन सुनिश्चित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदृष्टि के अनुसार, कुटीर और ग्राम उद्योग केवल परंपराएं नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्र मध्य प्रदेश का आधार हैं।

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