बैंक फ्रॉड मामलों में तेजी से जांच के लिए CBI का बड़ा कदम: DFS, LIC और बैंकों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों के साथ की हाई-लेवल मीटिंग
नई दिल्ली, 26 जून (अन्नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) के लंबित मामलों में जांच की गति को तेज करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समन्वय बैठक (Coordination Meeting) आयोजित की गई है। नई दिल्ली में 25 जून 2026 को आयोजित इस हाई-लेवल मीटिंग में सीबीआई (CBI), वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs), आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) व एलआईसी (LIC) के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVOs) ने हिस्सा लिया।
इस दिनभर चली लंबी बैठक में DFS के सचिव, सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक, सीबीआई के संयुक्त निदेशकों और DFS के संयुक्त सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में इन गंभीर और लंबित मुद्दों पर हुआ मंथन
प्रेस रिलीज के मुताबिक, बैठक का मुख्य एजेंडा अंतर्विभागीय सहयोग को बढ़ाना और बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच को जल्द से जल्द पूरा करना था। इस दौरान कई महत्वपूर्ण कानूनी और परिचालन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A के तहत पूर्व स्वीकृति।
पीसी एक्ट (PC Act) की धारा 19 के तहत मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी।
बैंकों से मिलने वाले प्रतीक्षित दस्तावेज (Awaited documents) और बैंक धोखाधड़ी की शिकायतें।
वन टाइम सेटलमेंट (OTS) से जुड़े मामले और अदालतों के हालिया फैसले।
फर्जी या अवैध रूप से इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते यानी 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) से संबंधित गंभीर चुनौतियां।
आपसी तालमेल से अधिकांश समस्याओं का मौके पर हुआ निपटारा
बैठक के दौरान सीबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा प्रासंगिक परिचालन मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुतियां (Presentations) दी गईं। इसके बाद सीबीआई अधिकारियों और विभिन्न बैंकों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVOs) के बीच बैंक-वार (Bank wise) चर्चा की गई, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश लंबित समस्याओं को मौके पर ही सुलझा लिया गया।
बैठक में इस बात को सराहा गया कि बैंकों और सीबीआई के बीच समय पर महत्वपूर्ण दस्तावेजों को साझा करने को लेकर बेहद करीबी समन्वय बना हुआ है। इसके साथ ही, प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आवश्यक मंजूरियों को तेजी से प्राप्त करने के लिए सक्रिय सहयोग पर विशेष जोर दिया गया।
प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने और समय पर जांच पूरी करने पर सहमति
सीबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों ने मामले-विशिष्ट विवरणों (Case-specific details) का आदान-प्रदान किया और लंबित जांचों को गति देने के रोडमैप पर विचार-विमर्श किया। सभी विभागों के बीच इस बात पर आम सहमति बनी कि प्रक्रियात्मक बाधाओं (Procedural bottlenecks) को दूर करने के लिए संस्थागत सहयोग को मजबूत किया जाएगा। बैठक के समापन पर सहयोग की इस गति को बनाए रखने, नियमित रूप से संरचित जुड़ाव जारी रखने और बैंक फ्रॉड के मामलों को समय सीमा के भीतर तार्किक अंजाम तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
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