केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन ने समुद्री खाद्य निर्यातकों की बैठक 2026 की अध्यक्षता की; वैश्विक बाज़ार तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति तैयार की

आरएस अनेजा, 11 अप्रैल नई दिल्ली - मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में “सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026” का आयोजन किया।

बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। इस बैठक का उद्देश्य सरकार और उद्योग से जुड़े हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक व्यवस्थित मंच प्रदान करना था, साथ ही निर्यातकों से बाजार तक पहुंच, मूल्य निर्धारण के दबाव और अनुपालन आवश्यकताओं से संबंधित वर्तमान चुनौतियों पर प्रतिक्रिया प्राप्त करना तथा द्वीपों, ईईजेड(विशेष आर्थिक क्षेत्र) और खुले समुद्र से मूल्य संवर्धन, बाज़ार विविधीकरण और समुद्री निर्यात के विस्तार के लिए आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने में निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, उन्होंने बताया कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में बेहतर प्रदर्शन रहा है। बाजार और उत्पाद विविधीकरण की निरंतर आवश्यकता पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कड़े नियामकीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। विशेष आर्थिक क्षेत्र(ईईजेड) नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ढांचे को एक्सेस पास के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं को रेखांकित किया और बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन अवसंरचना, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया। निर्यातकों से ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य करने और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित निवेशक बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निवेश हुए हैं, विशेष रूप से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है।

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