त्रिपुरा चिटफंड घोटाला: सीबीआई कोर्ट ने प्राइवेट कंपनी और उसके सीएमडी सहित तीन अधिकारियों को सुनाई 6 साल तक की सजा

त्रिपुरा, 1 जून (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, अगरतला स्थित पश्चिम त्रिपुरा जिला की विशेष सीबीआई अदालत ने त्रिपुरा चिटफंड घोटाले के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने 30 मई 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए एक निजी कंपनी 'मैसर्स प्रगति शील इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड' सहित उसके सीएमडी (CMD) और दो अन्य शीर्ष निदेशकों को दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की है.

सीएमडी और निदेशकों को 6-6 साल का सश्रम कारावास, कंपनी पर ₹7 लाख का जुर्माना

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, अदालत ने इस घोटाले के मुख्य आरोपियों— कंपनी के सीएमडी अरिंदम दास, निदेशक परितोष दास और प्रशासनिक निदेशक दिपशिखा चक्रवर्ती को 6-6 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है. इसके साथ ही इन तीनों व्यक्तिगत दोषियों पर 3-3 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. इसके अतिरिक्त, माननीय न्यायालय ने दोषी कारपोरेट इकाई 'मैसर्स प्रगति शील इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड' पर भी अलग से ₹7 लाख का भारी जुर्माना ठोंका है.

आम जनता से हड़पे थे ₹5-6 करोड़; साल 2013 में सीबीआई ने अपने हाथ में ली थी जांच

प्रेस रिलीज के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2012 में त्रिपुरा के कैलाशहर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस संख्या 90/2012 से जुड़ा है. त्रिपुरा राज्य सरकार और भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी अधिसूचनाओं के बाद, सीबीआई ने 8 अक्टूबर 2013 को इस मामले को दोबारा दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी. आरोपियों पर आरोप था कि उन्होंने आम जनता को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश के नाम पर करीब ₹5 से 6 करोड़ की भारी-भरकम राशि इकट्ठा की थी और बाद में शिकायतकर्ता व अन्य निवेशकों के पैसे वापस न कर पूरी रकम का गबन कर लिया था. गहन छानबीन के बाद, सीबीआई ने 28 मई 2018 को इन सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी.

वसूल किया गया जुर्माना और कुर्क संपत्तियां पीड़ितों में आनुपातिक रूप से बांटी जाएंगी

जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, विशेष न्यायाधीश (CBI), पश्चिम त्रिपुरा जिला, अगरतला ने अपने फैसले में यह भी आदेश दिया है कि दोषियों से जुर्माने के रूप में वसूल की गई राशि को संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को भेजा जाए. इस राशि को उनाकोटी जिले के जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर (DM & Collector, Kailashahar) के माध्यम से पीड़ित जमाकर्ताओं व निवेशकों के बीच उनके सब-डिवीजन की आवश्यकताओं के अनुसार आनुपातिक रूप से वितरित किया जाएगा. इसके साथ ही, अदालत ने सक्षम अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया है कि कानून के दायरे में रहते हुए, आरोपियों की कुर्क की गई संपत्तियों (Attached Assets) से धोखाधड़ी की गई रकम की अधिकतम वसूली की जाए और उसे उन चिन्हित निवेशकों में बांटा जाए जिन्हें उनका पैसा वापस नहीं मिल सका था.

#CBICourt #ChitFundScam #TripuraNews #CBIInvestigation#TripuraChitFund #StrictPunishment #PragatiSheelInfra #AgartalaCourt #InvestorsFraud #FinancialCrime #DanikKhabar

Previous

पंजाब में भी भाजपा की सरकार बनेगी, क्योंकि जनता विकास और काम करने वाली सरकार चाहती है -ऊर्जा मंत्री अनिल विज

Next

दैनिक खबर: आज 01 जून, 2026 के शाम 6 बजे के मुख्य समाचार