सब्जी फसलों में “एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन" पर नासिक में प्रशिक्षण आयोजित

एन.एस.बाछल, 17 जनवरी, भोपाल।

भारत सरकार के वनस्पति संरक्षण संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के उपक्रम कार्यालय केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, नासिक द्वारा आयोजित सब्जी फसलों में "एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन" विषय पर दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन प्रादेशिक कृषि विस्तार व्यवस्थापन प्रशिक्षण संस्था, नासिक में किया गया। एक महीने चले इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश राज्य के कृषि विभाग के 40 अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का समापन समारोह मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय, संयुक्त निदेशक, आईपीएम एवं टिड्डी विभाग, मुख्यालय फरीदाबाद, की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इसके अतिरिक्त समारोह में विशिष्ट अतिथि मुकेश महाजन, सहायक निदेशक, रामेती नासिक कृषि विभाग, महाराष्ट्र एवं डॉ. मनीष मोंढे, उप निदेशक, क्षेत्रीय केंद्रीय आईपीएम केंद्र, नागपुर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कार्यालय प्रमुख डॉ. अतुल ठाकरे, उप निदेशक, केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, नासिक ने परम्परागत तरीके से अतिथियों का स्वागत किया तथा बताया कि सीआईपीएमसी नासिक की पूरी टीम एवं निदेशालय के विशेषज्ञों ने मिलकर इस 30-दिवसीय दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाया। सब्जियों में 'एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन' पर आयोजित इस कार्यक्रम में दो विभिन्न राज्यों के कृषि अधिकारियों को आईपीएम की आधुनिक तकनीकों में इस उद्देश्य के साथ निपुण बनाया गया है कि, वे अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम करने और टिकाऊ सब्जी उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित कर सकें। हमें पूर्ण विश्वास है कि यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर सुरक्षित खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता पांडेय, संयुक्त निदेशक ने कहा कि यह प्रशिक्षण वनस्पति संरक्षण से जुड़े राज्य और केंद्र के कृषि अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस तरह के प्रशिक्षण हमें एक दूसरे को सुनने, समझने और साथ मिलकर काम करने का मंच प्रदान करते हैं। यह तालमेल ही हमारे किसानों तक सही तकनीक पहुँचाने की कुंजी है। जब आप सभी अधिकारी अपने-अपने राज्यों में लौटेंगे, तो सब्जी उत्पादन में आईपीएम जैसी वैज्ञानिक विधियों को बढ़ावा देंगे, जिससे न केवल किसानों की उत्पादन लागत कम होगी, बल्कि सब्जी फसलों में कीटनाशकों के अवशेष जैसी भारी समस्या का समाधान कर सकेंगे। इस प्रशिक्षण की असली सफलता है कि आप यहाँ से प्राप्त तकनीक को निकालकर किसान के खेत तक कितनी पहुँचाते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि एनपीएसएस मोबाइल ऐप से किसान समय सहते कीट एवं रोग की पहचान कर उनके प्रबंधन हेतु सलाह प्राप्त कर सकते है।आज कल खेती में रासायनिक कीटनाशक पर निर्भरता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से कृषि उत्पादों में कीटनाशक अवशेष की समस्या आ रही है। रासायनिक कीटनाशक हर किसी के स्वास्थ्य के साथ ही पर्यावरण के लिए भी बेहद नुकसानदेह होते हैं। खेती में रासायनिक कीटनाशियों के उपयोग में कमी लाने के लिए एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन एक लाभकारी विकल्प है। इसी उद्देश्य से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को सब्जी उत्पादन में कीट, रोग एवं खरपतवार के प्रबंधन संबंधी सैद्धांतिक व्याख्यान के साथ साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षेत्र भ्रमण, प्रदर्शन आदि शामिल किये गए ताकि प्रतिभागी एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर इसे खेत स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू कर किसानों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित एवं टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित कर सकें।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. शरद मधुकर गायकवाड, वनस्पति संरक्षण अधिकारी ने धन्यवाद भाषण प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए सभी अथितियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

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