होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वर्तमान में दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग बना हुआ है परंतु इसके बावजूद भारत के 8 जहाज निकलने में कामयाब रहे
होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वर्तमान में दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग बना हुआ है। inमार्च-अप्रैल 2026 के ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, यह वैश्विक संघर्ष और ऊर्जा संकट का केंद्र है।
क्या है और कहाँ स्थित है?
होरमुज एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर** से जोड़ता है।
भौगोलिक स्थिति
इसके उत्तर में ईरान है और दक्षिण में ओमान (मुसंदम प्रायद्वीप) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित हैं।
चौड़ाई अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह केवल 33 से 39 किलोमीटर चौड़ा है। जहाजों के आने-जाने के लिए सुरक्षित लेन मात्र 3 किलोमीटर की ही होती है।
इसका महत्व
होरमुज को दुनिया की "तेल की धमनी" (Artery of Oil) कहा जाता है:
ऊर्जा आपूर्ति
दुनिया का लगभग 20% से 25% तेल और 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी रास्ते से गुजरती है।
निर्भरता
इराक, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों के लिए यह समुद्र तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता है।
भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 70-80% इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
विभिन्न देशों का स्टैंड (2026 का संकट)
फरवरी-मार्च 2026 में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने के बाद इस क्षेत्र में तनाव चरम पर है
ईरान
इसने मार्ग को बंद करने की धमकी दी है और कई जहाजों पर ड्रोन/मिसाइल हमले किए हैं। ईरान इसे अपनी संप्रभुता और जवाबी कार्रवाई का हथियार मानता है। |
अमेरिका
अमेरिकी नौसेना ने "ऑपरेशन प्रॉस्परिटी गार्जियन 2" के तहत मार्ग को खुला रखने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया है। |
भारत
भारत का रुख ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित है। भारत ने ईरान से बातचीत कर अपने जहाजों के लिए 'सुरक्षित गलियारा' माँगा है। |
चीन
चीन इसे वैश्विक व्यापार के लिए खतरा मान रहा है लेकिन वह सीधे सैन्य भागीदारी के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है।
फंसे हुए जहाजों और नाविकों की संख्या और ताजा आंकड़े
भारतीय जहाजों और नाविकों की स्थिति
भारत सरकार और 'डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग' (DG Shipping) द्वारा जारी नवीनतम जानकारी के अनुसार:
फंसे हुए भारतीय जहाज
कुल 36 भारतीय झंडे वाले (Indian-flagged) जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इनमें से 24 जहाज होरमुज के पश्चिम (फारस की खाड़ी के अंदर) और 12 जहाज पूर्व (ओमान की खाड़ी की ओर) स्थित हैं।
फंसे हुए नाविक
इन 36 जहाजों पर कुल 1,074 भारतीय नाविक मौजूद हैं। हालाँकि, यदि पूरे खाड़ी क्षेत्र (विदेशी जहाजों पर कार्यरत भारतीयों सहित) की बात करें, तो लगभग 23,000 भारतीय नाविक इस युद्ध क्षेत्र के प्रभाव में हैं।
निकलने में सफल
अब तक 964 से अधिक नाविक विभिन्न माध्यमों से सुरक्षित निकाले जा चुके हैं। हाल ही में भारत-ईरान कूटनीतिक वार्ता के बाद 8 से 9 प्रमुख जहाजों (जैसे Green Asha, Green Sanvi, Jag Vasant ) को सुरक्षित रास्ता दिया गया है।
अंतरष्ट्रीय स्तर की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और समुद्री खुफिया डेटा (Kpler) के अनुसार वैश्विक आंकड़े इस प्रकार हैं
कुल फंसे हुए जहाज
लगभग 2,190 से 3,200 व्यापारिक जहाज होरमुज के आसपास और फारस की खाड़ी के अंदर रुके हुए हैं। इनमें 320 से अधिक तेल और गैस टैंकर शामिल हैं।
कुल फंसे हुए नाविक
पूरी दुनिया के लगभग 20,000 से अधिक नाविक वर्तमान में इन जहाजों पर फंसे हुए हैं।
यातायात की स्थिति
सामान्य दिनों में यहाँ से रोज 120 जहाज गुजरते थे, लेकिन वर्तमान में ईरान के 'सिलेक्टिव ब्लॉकेड' (चयनात्मक नाकाबंदी) के कारण केवल 5 से 11 जहाज ही प्रतिदिन निकल पा रहे हैं।
निकलने में सफल
ईरान ने चीन, मलेशिया और भारत जैसे मित्र देशों के कुछ जहाजों को लारक द्वीप" (Larak Island) के पास बने एक विशेष कॉरिडोर से निकलने की अनुमति दी है। अब तक लगभग 48 गैर-ईरानी जहाज इस रास्ते का उपयोग कर बाहर निकल सके हैं।
28 फरवरी 2026 को संकट शुरू होने के बाद से
क्षतिग्रस्त जहाज
कम से कम 6 व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं।
लापता/मृत
कुल 2 नाविक या तो मारे गए हैं या लापता हैं।
डूबने वाले जहाज
1 टगबोट (Mussafah 2) पूरी तरह डूब चुकी है।
छोड़े गए जहाज
हमलों के डर से या नुकसान के कारण 7 जहाजों को चालक दल द्वारा समुद्र में ही छोड़ दिया गया है।
निष्कर्ष
भारत अपने "मित्र राष्ट्र" होने के दर्जे का लाभ उठाकर अपने जहाजों को धीरे-धीरे सुरक्षित निकाल रहा है, लेकिन अभी भी सैकड़ों नाविक और दर्जनों जहाज खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने के लिए प्रति जहाज $2 मिलियन (लगभग 16 करोड़ रुपये) तक का 'तेहरान टोल' (Tehran Toll) या कूटनीतिक छूट की
आवश्यकता पड़ रही है।
मार्च 2026 के अंत और अप्रैल की शुरुआत तक की रिपोर्टों के अनुसार स्थिति काफी गंभीर है
खबर यह है कि भारत-ईरान बातचीत के बाद कुछ जहाजों को सुरक्षित निकलने की अनुमति मिली है, लेकिन अभी भी कई नाविकों की वापसी की प्रक्रिया जारी है।
स्थिति
पल-पल बदल रही है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अब इस रास्ते के बजाय अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर लंबा रास्ता अपना रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और सामान की कीमतें काफी बढ़ गई हैं
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