पंजाब और हरियाणा में खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी के साथ ही इस वर्ष धान की कटाई का मौसम सम्पन्न
आरएस अनेजा, 2 दिसम्बर नई दिल्ली - पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष-पराली जलाने की घटनाओं में कमी के साथ ही इस वर्ष धान की कटाई का मौसम समाप्त हो गया है। इसके साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को आधिकारिक तौर पर दर्ज करने, उनकी निगरानी और आकलन भी समाप्त हो गया है। इसरो द्वारा विकसित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार प्रतिवर्ष 15 सितंबर से 30 नवंबर तक यह प्रक्रिया संचालित की जाती है।
क्षेत्र में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के समन्वित ढांचे से हाल के वर्षों में इसमें निरंतर कमी आई है। हालांकि मौसम संबंधी परिस्थितियां भी दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, लेकिन इस मौसम में खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में आई काफी कमी ने संभावित वायु प्रदूषण को काफी हद तक सीमित कर दिया।
वर्ष 2025 में धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने की सबसे कम घटना दर्ज की गई। पंजाब में ऐसी 5,114 घटनाएं दर्ज की गईं, जो वर्ष 2024 की तुलना में 53 प्रतिशत कम है। यह वर्ष 2023 की तुलना में 86 प्रतिशत, 2022 की तुलना में 90 प्रतिशत और वर्ष 2021 की तुलना में 93 प्रतिशत कम रही।
इसी तरह, हरियाणा में भी बेहतर निगरानी से इस साल केवल 662 पराली जलाने की घटनाएं हुई। राज्य में 2024 की तुलना में 53 प्रतिशत, 2023 की तुलना में 71 प्रतिशत, 2022 की तुलना में 81 प्रतिशत और 2021 की तुलना में 91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। ये आंकड़े वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की योजनानुसार राज्य-विशिष्ट फसल अवशेष प्रबंधन उपाय शुरू करने के बाद महत्वपूर्ण गिरावट को दर्शाते हैं।