पराली व फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए किया टीमों का गठन : उपायुक्त
जे कुमार, पलवल, 28 सितम्बर - उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि जिला में पराली व फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को शून्य करने के लिए जिला स्तरीय, खंड स्तरीय, उपमंडल स्तरीय व ग्राम स्तरीय टीम का गठन किया गया है। ग्राम स्तरीय टीमें जिले में गांव-गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक व प्रेरित कर रही हैं। यदि कोई किसान पराली जलायेगा तो उस पर दो एकड़ तक 5 हजार, 5 एकड़ तक 15 हजार व उससे ऊपर 30 हजार रुपये तक जुर्माना करने, एफआईआर दर्ज करने व किसान के रकबे की रेड एंट्री करके दो सत्र तक एम.एस.पी. पर फसल नहीं खरीदने की जानकारी टीमें दे रही हैं।
यही टीमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तहत जिला और दूसरे राज्यों से आए बेलरों द्वारा धान की पराली की गांठे बनवाने और धान के अवशेषों को कल्टीवेटर, रोटावेटर व हेरो आदि से मिट्टी में मिलाकर व गांठें बनाकर उसका प्रबंधन करने पर विभाग द्वारा दी जा रही 1200/- रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि लेने की भी अपील कर रही है।
फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को वितरित की गई 1.84 करोड़ की प्रोत्साहन राशि : उप-कृषि निदेशक डा. बाबू लाल ने बताया कि पलवल के करीब 2478 किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पिछले साल लगभग 18 हजार एकड़ जमीन का रजिस्ट्रेशन करवाया था और उन किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से कुल 1.84 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि कृषि विभाग द्वारा दी गई थी।
जिला में इस बार फसल अवशेष प्रबंधन के तहत अधिक से अधिक पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है और सभी पंजीकृत किसानों को इस बार 1200/- रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। पलवल जिले में इस बार 1.16 लाख एकड़ धान का रकबा है जिसमें 1509, मुच्छल व बासमती आदि मुख्य किस्में शामिल है।
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