दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर वैज्ञानिक प्रहार: CAQM तैनात करेगा विषय विशेषज्ञ, ट्रैफिक, EV और उद्योगों के लिए बनेगा सख्त एक्शन प्लान
नई दिल्ली, 22 जुलाई (अन्नू): दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हर साल सर्दियों के दौरान गंभीर रूप लेने वाले वायु प्रदूषण से वैज्ञानिक और रणनीतिक तौर पर निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बड़ा और नीतिगत कदम उठाया है। आयोग ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर जिलों में प्रदूषण नियंत्रण नीतियों को अधिक व्यावहारिक, त्वरित और असरदार बनाने के लिए विशेषज्ञ सलाहकारों (Subject Matter Experts) की सीधी तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वाहनों के धुएं, ट्रैफिक जाम और औद्योगिक उत्सर्जन पर रहेगा मुख्य फोकस
CAQM का यह नया मॉडल मुख्य रूप से प्रदूषण पैदा करने वाले तीन सबसे बड़े कारकों—वाहनों का उत्सर्जन, सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम और औद्योगिक धुएं पर कड़ा प्रहार करने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत सतत परिवहन (Sustainable Transport), यातायात सुरक्षा (Traffic Safety), आधुनिक प्रौद्योगिकी और रणनीति प्रबंधन के विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम गठित की जा रही है, जो सीधे आयोग के साथ मिलकर काम करेगी।
विशेषज्ञों की टीम का मुख्य कार्यबल:
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: ईवी (EV) मोबिलिटी और सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने का खाका तैयार करना।
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट: सड़कों पर रेंगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों से होने वाले अतिरिक्त उत्सर्जन को कम करने के लिए ट्रैफिक नीतियां बनाना।
आधुनिक तकनीक का प्रयोग: डेटा एनालिसिस और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान करना।
सख्त ग्रैप (GRAP) कार्यान्वयन: ग्रैप (Graded Response Action Plan) के नियमों को कागजों से निकालकर जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू कराना।
अफ़सरशाही के पारंपरिक ढर्रे से हटकर 'परफॉर्मेंस-बेस्ड' मॉडल
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका 'प्रदर्शन आधारित' (Performance-Based) मॉडल है। आयोग द्वारा जारी ऑफिशियल 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) के अनुसार, विशेषज्ञों और कंसल्टेंट्स की नियुक्तियां व भुगतान पूरी तरह से उनके द्वारा दिए गए व्यावहारिक नतीजों (Deliverables) और तय समय-सीमा में प्रोजेक्ट पूरे करने के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
अब तक प्रदूषण नियंत्रण के फैसले मुख्य रूप से प्रशासनिक स्तर पर लिए जाते रहे हैं, जिससे पराली, निर्माण धूल और वाहनों के एकीकृत धुएं पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही थी। विशेषज्ञों की सीधी भागीदारी से अब विभागों और चूक करने वाली इंडस्ट्रियों के खिलाफ वैज्ञानिक और त्वरित एक्शन लिया जा सकेगा, जिससे एनसीआर के करोड़ों नागरिकों को साफ हवा मिलने की उम्मीद जगी है।
#DelhiPollutions #CAQM #AirQualityIndex #DelhiNCR #PollutionControl #GRAP #CleanAir #EnvironmentNews #BreakingNews #DanikKhabar
Previous
मध्यप्रदेश पुलिस का नशे के विरुद्ध सख्त प्रहार
Next