समुद्र मंथन’ योजना: भारत का सबसे बड़ा ₹84,084 करोड़ का अपतटीय ऊर्जा अन्वेषण अभियान स्वीकृत; आयात बिल में होगी ₹1 लाख करोड़ की बचत

आरएस अनेजा, 01 अगस्त , नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की महत्वाकांक्षी केंद्रीय क्षेत्र योजना "समुद्र मंथन" (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन के लिए ₹84,084 करोड़ के कुल बजट वाली यह योजना भारत का अब तक का सबसे बड़ा अपतटीय (Offshore) तेल एवं गैस अन्वेषण अभियान है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सालाना लगभग 144 बिलियन डॉलर (करीब ₹13 लाख करोड़) का कच्चा तेल आयात करता है। 'समुद्र मंथन' योजना का मुख्य लक्ष्य देश की आयात पर निर्भरता को घटाना, घरेलू तेल व गैस उत्पादन बढ़ाना और रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

'समुद्र मंथन' योजना के 4 प्रमुख घटक और बजट आवंटन

सरकार द्वारा स्वीकृत ₹84,084 करोड़ के कुल बजट को चार मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है:

  • 1. अपतटीय डेटा संकलन (कुल ₹28,534 करोड़):

    • बेसिन-व्यापी कवरेज के लिए 2D भूकंपीय डेटा संकलन: ₹12,000 करोड़

    • 3D भूकंपीय डेटा संकलन व अन्य तकनीकें: ₹12,534 करोड़

    • NDR डेटा रीप्रोसेसिंग और AI टूल्स का उपयोग: ₹4,000 करोड़

  • 2. अन्वेषण कुओं की खुदाई व अवसंरचना (कुल ₹55,200 करोड़):

    • गहरे पानी में 60 अन्वेषण कुओं की खुदाई (खुदाई लागत का 50% या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआं सरकारी सहायता): ₹43,200 करोड़

    • खोजों के व्यावसायीकरण के लिए सामान्य अपतटीय अवसंरचना केंद्रों का विकास: ₹10,000 करोड़

    • तेल और गैस विनिर्माण व सेवा क्षेत्रों का विकास (घरेलू निर्माण को बढ़ावा): ₹2,000 करोड़

  • 3. निगरानी और सहायता गतिविधियां:

    • डिजिटल उपाय, निगरानी, मानव संसाधन व प्रचार-प्रसार: ₹350 करोड़

योजना के मुख्य बिंदु और रणनीतिक प्रभाव

  • 99% EEZ अन्वेषण के लिए खुला: पहले के 'नो-गो' प्रतिबंधों को हटाकर भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का लगभग 99% हिस्सा (10 लाख वर्ग किमी से अधिक) अन्वेषण के लिए उपलब्ध कराया गया है।

  • जोखिम-साझाकरण मॉडल: गहरे पानी में एक कुएं की खुदाई में $125-150 मिलियन की भारी लागत आती है। निजी व सार्वजनिक कंपनियों का जोखिम कम करने के लिए सरकार खुदाई की 50% तक लागत वहन करेगी।

  • उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य: योजना की सफलता से भारत का घरेलू तेल व गैस उत्पादन 62 MMTOE से बढ़कर 80 MMTOE प्रति वर्ष होने का अनुमान है।

  • विदेशी मुद्रा की बचत: घरेलू उत्पादन बढ़ने से कच्चे तेल के आयात बिल में सालाना ₹1 लाख करोड़ की बचत होगी।

  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: कृष्णा-गोदावरी (KG Basin), कावेरी, महानदी और अंडमान जैसे गहरे व अति-गहरे समुद्री बेसिनों में खोज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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