लाल किला ब्लास्ट मामला: NIA ने मुख्य फरार आरोपी सहित 3 और के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट; अल-कायदा से जुड़े हैं तार

नई दिल्ली, 28 जून (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में लाल किला क्षेत्र के पास नवंबर 2025 में हुए भीषण कार बम विस्फोट मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। NIA ने इस मामले में एक मुख्य फरार (भगोड़े) आरोपी सहित तीन और आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) दाखिल की है। इस दर्दनाक धमाके में 11 लोगों की जान चली गई थी।

चार्जशीट में शामिल नए आरोपियों की पहचान

NIA द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, विशेष अदालत (पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली) में दाखिल की गई इस पूरक चार्जशीट (केस नंबर RC-21/2025/NIA/DLI) में जम्मू-कश्मीर के रहने वाले तीन लोगों को नामजद किया गया है:

  1. जमीर अहमद अहंगर (Zameer Ahmad Ahanger)

  2. तुफैल अहमद भट (Tufail Ahmad Bhat)

  3. मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज उर्फ जफर (Muzafar Ahmad @ Faraz @ Zafar)मुख्य फरार आरोपी

इन तीन नए नामों के साथ ही इस मामले में अब तक चार्जशीट किए गए कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जिसमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जिसकी मृत्यु हो चुकी है) भी शामिल है।

अल-कायदा के विंग का संस्थापक सदस्य निकला बच्चों का डॉक्टर

जांच में फरार मुख्य आरोपी मुजफ्फर अहमद को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:

  • पेशे से पीडियाट्रिशियन: मुजफ्फर अहमद पेशे से एक बच्चों का डॉक्टर (MBBS, MD) है। वह इस मामले के सह-आरोपी डॉ. अदील अहमद राथर का बड़ा भाई है।

  • आतंकी संगठन का संस्थापक: एनआईए की जांच के मुताबिक, मुजफ्फर अहमद आतंकी संगठन अल-कायदा के एक विंग "AGuH Interim" का संस्थापक सदस्य है।

  • साजिश का मास्टरमाइंड: वह उमर, मुजम्मिल, अदील और मुफ्ती इरफान के साथ मिलकर 10 नवंबर 2025 को हुए इस घातक 'व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' (VBIED) यानी कार बम ब्लास्ट की साजिश रचने वाले मुख्य रणनीतिकारों में से एक था।

फरीदाबाद की यूनिवर्सिटी में बनते थे आईईडी (IED)

NIA द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, मुजफ्फर अहमद जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह में हुई एक गुप्त बैठक में शामिल हुआ था, जहां आतंकी मॉड्यूल "AGuH Interim" की नींव रखी गई थी। जांच में सामने आया है कि वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में उमर और मुजम्मिल द्वारा गुप्त रूप से संचालित की जा रही एक आईईडी निर्माण इकाई में शामिल था। वहां वह 'TATP' आधारित खतरनाक आईईडी बनाने, उनके परीक्षण (टेस्टिंग) और उन्हें सुरक्षित रखने के काम में गहराई से जुटा हुआ था। फिलहाल उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

हथियारों और फंड की सप्लाई: ₹3 लाख में डील

चार्जशीट में शामिल अन्य दो आरोपियों की भूमिका भी बेहद गंभीर पाई गई है:

  • जमीर अहमद अहंगर: यह आतंकी मॉड्यूल (AGuH Interim) के लिए एक 'ओवरग्राउंड वर्कर' (OGW) के रूप में काम कर रहा था। वह लगातार आतंकी हैंडलर्स के संपर्क में था और हथियारों, गोला-बारूद के साथ-साथ टेरर फंडिंग के कैश को इधर से उधर पहुंचाने (कुरियर) का काम करता था।

  • तुफैल अहमद भट: प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का पूर्व ओजीडब्ल्यू (OGW) तुफैल, इस मॉड्यूल के लिए हथियारों का सप्लायर था। उसने एक हैंडलर के जरिए ठिकाने लगाए गए (डेड ड्रॉप) हथियारों के जखीरे से एक AK-47 राइफल, एक क्रिनकोव (Krinkov) राइफल, एक पिस्टल, मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए थे। बाद में उसने इन हथियारों को ₹3 लाख की रकम के बदले मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (मृतक) तक पहुंचाया था।

कड़े कानूनों के तहत दर्ज हुआ मुकदमा

NIA की विशेष अदालत में गिरफ्तार आरोपियों (जमीर और तुफैल) के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 13, 18, 20, 23, 38, 39 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं। वहीं फरार मुजफ्फर अहमद के खिलाफ बीएनएस (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम (Explosive Substances Act) और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) की विभिन्न कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

NIA ने मल्टी-डिसिप्लिनरी साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन, विस्तृत फोरेंसिक जांच, जियो-लोकेशन मैपिंग और वित्तीय लेन-देन के बारीक विश्लेषण (Financial-trail analysis) के जरिए इन सभी आरोपियों के बीच आपसी संबंधों को पूरी तरह स्थापित कर दिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

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