राखीगढ़ी से प्राप्त मानव कंकाल अवशेष उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण को सौंपे
आरएस अनेजा, 22 जून नई दिल्ली - हरियाणा के राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल से हाल ही में प्राप्त मानव कंकाल अवशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान, भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई) को विस्तृत वैज्ञानिक जांच के लिए औपचारिक रूप से सौंप दिया गया है।
भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक प्रोफेसर बी.वी. शर्मा ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत किए गए इस हस्तांतरण से सिंधु-सरस्वती सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण शहरी केंद्रों में से एक में बहुविषयक अनुसंधान को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
लगभग 550 हेक्टेयर में फैला हरियाणा का राखीगढ़ी, सिंधु-सरस्वती सभ्यता की सबसे बड़ी ज्ञात बस्ती के रूप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। पुरातात्विक उत्खनन से प्रारंभिक हड़प्पा काल से लेकर परिपक्व हड़प्पा काल तक निरंतर बसावट के प्रमाण मिले हैं। इनमें नियोजित बस्तियां, जल निकासी व्यवस्था, शिल्प उत्पादन केंद्र, व्यापार नेटवर्क और कब्रिस्तान शामिल हैं। वर्ष 2025-26 के क्षेत्र सत्र में ग्रेटर नोएडा स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उत्खनन शाखा-II द्वारा किए गए उत्खनन के दौरान, पुरातत्वविदों ने टीला संख्या 7 में आठ कब्रें खोजीं, जिसे पहले कब्रिस्तान के रूप में पहचाना गया था।
तीन पूर्ण मानव कंकाल, अन्य कब्रों से प्राप्त कंकाल के टुकड़ों के साथ, विस्तृत जांच के लिए कोलकाता स्थित भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के प्राचीन मानव कंकाल भंडार और प्रयोगशाला में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इन स्थलों से प्राप्त शेष कंकाल सामग्री को भी कुछ दिनों में स्थानांतरित किए जाने की उम्मीद है।
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