पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा, मई महीने में चौथी बार बढ़े ईंधन के दाम
नई दिल्ली, 25 मई (अन्नू): अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने सोमवार 25 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बड़ा इजाफा कर दिया है। आज से पेट्रोल की कीमतों में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस नए उछाल के बाद देश की राजधानी दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹102.12 और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गई है। ईंधन के दामों में अचानक आई इस तेजी से आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर पड़ने वाला है।
मई महीने में चौथी बार लगी 'महंगाई की आग', 15 दिन में कई रुपये बढ़े दाम
चालू मई महीने के भीतर ईंधन की कीमतों में यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे साफ है कि तेल कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए लगातार दाम बढ़ा रही हैं:
25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा हुआ।
23 मई: पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया था।
19 मई: दोनों ईंधनों के दामों में औसतन 90 पैसे का इजाफा किया गया था।
15 मई: महीने के मध्य में कीमतों में सीधे ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी हुई थी।
ईरान-अमेरिका तनाव का असर: 70 डॉलर से 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति शुरू होने से पहले वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने हुए थे, जो अब उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) पर वित्तीय दबाव बेहद बढ़ गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का भारी नुकसान हो रहा था, जिसकी भरपाई के लिए यह कदम उठाना पड़ा।
बेस प्राइस से 3 से 4 गुना तक क्यों बढ़ जाती है कीमत? समझें पूरा गणित
सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत हर दिन सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर नए रेट अपडेट करती हैं। रिफाइनरी से निकलने के बाद उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले इसमें कई प्रकार के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिससे कीमत बेस प्राइस से तीन-चार गुना तक बढ़ जाती है:
क्रूड का बेस प्राइस: अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात किए गए कच्चे तेल की वास्तविक प्रति लीटर लागत।
ओएमसी चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ (रिफाइन) करने की लागत और तेल कंपनियों का अपना मार्जिन।
सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी: केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क और रोड सेस, जो पूरे देश में समान रहता है। (सरकार ने बीते 27 मार्च को कीमतों को स्थिर रखने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की कटौती भी की थी, जिसके बाद पेट्रोल पर कुल ड्यूटी ₹11.90 और डीजल पर ₹7.8 प्रति लीटर रह गई थी)।
डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को दिया जाने वाला निश्चित कमीशन।
स्टेट वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने मुताबिक लोकल सेल्स टैक्स या वैट लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसी वजह से दिल्ली, मुंबई, हरियाणा और पंजाब जैसे अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट अलग हो जाते हैं।
मार्च 2024 से स्थिर थे दाम, कच्चे तेल में तेजी रही तो और बढ़ सकते हैं रेट
इससे पहले देश में पेट्रोलและ डीजल की कीमतें मार्च 2024 से लगातार स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले केंद्र सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को बड़ी राहत दी थी। राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण लंबे समय तक विनियमित होने के बावजूद तेल कंपनियों ने रेट नहीं बदले थे, लेकिन अब घाटा बढ़ने के कारण कंपनियां हर दूसरे-तीसरे दिन दाम बढ़ा रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक यही तेजी बनी रही, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में और भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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