मालदा चुनावी नाकेबंदी और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने का मामला: NIA ने 31 आरोपियों के खिलाफ दर्ज की चार्जशीट
नई दिल्ली, 3 जून (अन्नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव से पहले हुई हिंसक नाकेबंदी और न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को अवैध रूप से बंधक बनाने व रोकने के मामलों में एक बड़ी कार्रवाई की है। NIA की प्रेस रिलीज के अनुसार, एजेंसी ने इस संबंध में दर्ज चार अलग-अलग मामलों में कुल 31 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है।
यह सभी मामले मालदा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के दौरान किए गए रोड ब्लॉक और न्यायिक अधिकारियों के अवैध अलगाव/बंधक बनाने से जुड़े हैं। एनआईए ने ये चार्जशीट कोलकाता (पश्चिम बंगाल) स्थित विशेष एनआईए अदालत (NIA Special Court) के समक्ष पेश की है।
डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तय हुए आरोप
प्रेस रिलीज के मुताबिक, मालदा क्षेत्र को हिलाकर रख देने वाली ये हिंसक घटनाएं अप्रैल महीने में हुए राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले घटित हुई थीं। एनआईए ने विभिन्न डिजिटल व तकनीकी साक्ष्यों, पुख्ता दस्तावेजों, मौखिक गवाहों और घटना के समय मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की गहन जांच करने के बाद इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए हैं।
सभी 31 आरोपियों पर कानून के उल्लंघन के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम (National Highways Act), 1956 और पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम (WBMPO Act), 1972 की संबंधित धाराएं शामिल हैं।
साजिश के तहत रोके गए थे सरकारी वाहन और अधिकारी
चार्जशीट में प्रत्येक आरोपी की विशिष्ट और तयशुदा भूमिका का विस्तार से विवरण दिया गया है। एनआईए की जांच में यह पूरी तरह से साबित हो चुका है कि ये आरोपी मालदा जिले के विभिन्न स्थानों पर मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों के वाहनों को रोकने और उन्हें बंधक बनाने की साजिश में सीधे तौर पर शामिल थे।
गौरतलब है कि देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) द्वारा इस गंभीर मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेने और कड़े निर्देश जारी करने के बाद ही एनआईए ने इन मामलों की जांच अपने हाथों में ली थी।
संवैधानिक और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास
एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, सभी आरोपियों ने एक सोची-समझी और समन्वित रणनीति (Coordinated Manner) के तहत गैरकानूनी रूप से भीड़ जुटाई, सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध किया और सरकारी अधिकारियों के काम में भारी बाधा उत्पन्न की। उन्होंने एसआईआर (SIR) ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों को गलत तरीके से बंधक बनाकर रखा।
आरोपियों के इस कृत्य से न केवल संवैधानिक और वैधानिक चुनावी प्रक्रियाओं में सीधा हस्तक्षेप हुआ, बल्कि लोक सेवकों (Public Servants) द्वारा अपनी आधिकारिक ड्यूटी निभाने में भी अड़चन आई। इन अवैध गतिविधियों के माध्यम से आरोपियों ने पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था को पूरी तरह से बिगाड़ दिया था।
फरार संदिग्धों की तलाश और आगे की जांच जारी
प्रेस विज्ञप्ति के अंत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने साफ किया है कि इस पूरी साजिश के पीछे छिपे अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए जांच अभी भी लगातार जारी है। घटना के बाद से फरार चल रहे अन्य आरोपियों और संदिग्धों की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने के लिए एनआईए की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं, ताकि संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने और सार्वजनिक जीवन को अस्त-व्यस्त करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।
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