258 करोड़ के ड्रग्स की क्रॉस-बॉर्डर तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामला: चेन्नई और रामनाथपुरम में ED की बड़ी छापेमारी
नई दिल्ली, 28 मई (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के चेन्नई जोनल ऑफिस ने ड्रग्स की इंटरनेशनल क्रॉस-बॉर्डर तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े नेटवर्क पर तगड़ा प्रहार किया है। मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए ईडी की टीमों ने तमिलनाडु के चेन्नई और रामनाथपुरम में पांच अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ सर्च ऑपरेशन चलाया है।
ईडी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस छापेमारी के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध और अवैध कमाई से जुड़े कई चौंकाने वाले डिजिटल व दस्तावेजी सबूत (incriminating evidence) जब्त किए गए हैं।
डीआरआई (DRI) की दो शिकायतों के बाद ED ने दर्ज किया था केस
प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज की गई दो अलग-अलग शिकायतों से हुई थी। इन शिकायतों के आधार पर ही ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का क्रिमिनल केस दर्ज कर अपनी जांच शुरू की। यह पूरा नेटवर्क दो बड़े मामलों से जुड़ा है:
पहला मामला (मन्नार की खाड़ी): डीआरआई और इंडियन कोस्ट गार्ड (भारतीय तटरक्षक बल) ने एक संयुक्त ऑपरेशन में मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar) से एक देसी नाव को इंटरसेप्ट किया था। इस नाव से 99 किलोग्राम हाशिश (Hashish) बरामद हुई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 108 करोड़ रुपये थी और इसे समुद्र के रास्ते श्रीलंका तस्करी किया जा रहा था।
दूसरा मामला (मदुरै रेलवे स्टेशन): डीआरआई के अधिकारियों ने मदुरै रेलवे स्टेशन पर फिलोमेन प्रकाश नाम के एक शख्स को दबोचा था। उसके पास से 37.645 किलोग्राम मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) ड्रग्स बरामद हुई थी, जिसकी इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू करीब 150 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वह इस खेप को चेन्नई से मदुरै अपने साथियों को सप्लाई करने ले जा रहा था।
जॉन ब्रिट्टो निकला दोनों वारदातों का मुख्य मास्टरमाइंड, हवाला से होता था पेमेंट
ईडी की जांच में यह साफ हुआ है कि इन दोनों बड़ी ड्रग्स तस्करी की घटनाओं के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड जॉन ब्रिट्टो (John Britto) नाम का शख्स है। वही प्रतिबंधित मादक पदार्थों का इंतजाम करता था।
जॉन ब्रिट्टो ने श्रीलंका ड्रग्स भेजने के लिए रेमिस्तान, रामिश, जानसन और प्रताप नाम के स्थानीय मछुआरों और नाव मालिकों को अपने साथ मिलाया हुआ था, जिन्हें काम के बदले मोटा कमीशन दिया जाता था। इस पूरे ड्रग्स सिंडिकेट को चलाने, कोरियरों को पैसे देने और अपने रिश्तेदारों व करीबियों तक ड्रग्स की काली कमाई पहुंचाने के लिए जॉन ब्रिट्टो हवाला चैनल्स (Hawala Channels) का इस्तेमाल कर रहा था।
विदेश में बैठकर रिमोटली सिंडिकेट चला रहा है मास्टरमाइंड
ईडी की प्रेस रिलीज में खुलासा किया गया है कि ड्रग्स के इस धंधे से आरोपियों ने करोड़ों रुपये का 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध की कमाई) जेनरेट किया है। मुख्य सरगना जॉन ब्रिट्टो फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्तारी से बचने के लिए देश से फरार (भगोड़ा) है और किसी विदेशी लोकेशन पर छिपकर रिमोटली अपने इस काले साम्राज्य और सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा है। ईडी इस नेटवर्क की कड़ियों को पूरी तरह खंगालने के लिए आगे की जांच में जुटी है।
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