भोपाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई: पूर्व आईएएस अरविंद जोशी की ₹22.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क; क्रिकेट एकेडमी और होटल-रिसॉर्ट्स पर कसा शिकंजा

भोपाल, 1 जुलाई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भोपाल जोनल ऑफिस ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी द्वारा जारी अधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, मध्य प्रदेश कैडर के दिवंगत पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी अरविंद जोशी और अन्य से जुड़े मामले में ₹22.46 करोड़ (लगभग) की चल-अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से कुर्क (Provisional Attachment Order) करने के आदेश जारी किए गए हैं। यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत 30 जून 2026 को अमल में लाई गई है।

क्रिकेट एकेडमी, होटल और आलीशान रिसॉर्ट्स किए गए अटैच

प्रेस रिलीज के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियों में भोपाल के ग्राम सेमरी बाज्याफत (Village Semri Bajyafat) में स्थित एक बड़ी क्रिकेट एकेडमी, उससे जुड़े अन्य संबंधित ढांचे (जैसे आलीशान होटल्स और रिसॉर्ट्स) और उसके नीचे की पूरी जमीन शामिल है। यह पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर अवैध कमाई के पैसों से तैयार किया गया था।

आईएएस दंपत्ति की ₹41.87 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का है पूरा मामला

ईडी की इस जांच का मुख्य आधार भोपाल के 'स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट' (लोकायुक्त) द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर है। यह एफआईआर मध्य प्रदेश कैडर के दो पूर्व आईएएस अधिकारियों—दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी श्रीमती टीनू जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दर्ज की गई थी।

  • काली कमाई से खड़ा किया साम्राज्य: जांच में सामने आया था कि इस नौकरशाह दंपत्ति के पास उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अलग करीब ₹41.87 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां मौजूद थीं।

  • पद का दुरुपयोग: इन दोनों अधिकारियों पर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने और भ्रष्ट तौर-तरीकों में लिप्त रहने के व्यापक आरोप और सबूत मिले थे। अरविंद जोशी ने अपराध की इस काली कमाई (Proceeds of Crime) का इस्तेमाल कर अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों और बेहद करीबी करीबियों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां खरीदी थीं।

'फेथ क्रिकेट क्लब' और बेनामी लेन-देन का खुला खेल

ईडी की प्रेस रिलीज के अनुसार, वित्तीय जांच के दौरान यह पूरी तरह साबित हो गया है कि दागी और अवैध संपत्तियों के असली मालिकाना हक (Beneficial Ownership) को छिपाने के लिए बेनामी संस्थाओं, फर्जी समझौतों (Sham Agreements) और परतों में जटिल लेन-देन (Layered Transactions) का सहारा लिया गया था।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि 'फेथ क्रिकेट क्लब' (Faith Cricket Club) के सारे वित्तीय मामलों और प्रबंधन को खुद दिवंगत अरविंद जोशी ही संभाल रहे थे। इस क्रिकेट एकेडमी और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में जो भी भारी निवेश किया गया था, वह वास्तव में अरविंद जोशी की इसी काली कमाई का हिस्सा था, जिसे उनके करीबी सहयोगी राघवेंद्र सिंह तोमर के माध्यम से रूट और फाइनेंस किया गया था।

पहले भी जब्त हो चुकी है ₹13.60 करोड़ की प्रॉपर्टी

प्रवर्तन निदेशालय ने प्रेस रिलीज में यह भी स्पष्ट किया है कि इस बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यह पहली कार्रवाई नहीं है। ईडी द्वारा इससे पहले भी इस केस से जुड़ी लगभग ₹13.60 करोड़ की संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है। इसके साथ ही, विभाग द्वारा भोपाल की माननीय विशेष पीएमएलए कोर्ट (PMLA Court) के समक्ष इस मामले में अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) भी पहले ही दायर की जा चुकी हैं।

ईडी के अधिकारियों का कहना है कि पीएमएलए के तहत इस मामले की आगे की जांच अभी भी सरगर्मी से जारी है, ताकि इस अपराध से अर्जित की गई बाकी बची हुई अन्य काली कमाई (Proceeds of Crime) और बेनामी संपत्तियों की पहचान करके उन्हें भी जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाकर अटैच किया जा सके।

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