दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: सेना में भर्ती के नाम पर ठगने वाला ₹20,000 का इनामी रौशन खान कोलकाता से गिरफ्तार, सरदार बनकर छिपा था आरोपी
नई दिल्ली, 3 जून (अन्नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के अंतर्गत आने वाली एनडीआर (NDR) विंग ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए सेना में भर्ती कराने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर और लंबे समय से फरार चल रहे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर (DCP) हर्ष इंदोरा (IPS) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, पकड़े गए आरोपी की पहचान रौशन खान उर्फ एसके रौशन उर्फ बलविंदर सिंह (उम्र 37 वर्ष, निवासी कोलकाता, पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है।
अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने इसकी गिरफ्तारी पर ₹20,000 का नकद इनाम घोषित किया हुआ था। क्राइम ब्रांच की टीम ने शातिर आरोपी को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से रंगे हाथों धर दबोचा है।
फौजी की वर्दी पहनकर जालसाज ने जाल में फंसाया, पोर्टेबल केबिन में कराया फेक मेडिकल
प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बिहार के रहने वाले कश्यप कुमार नामक एक पीड़ित छात्र ने दिल्ली कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई। कश्यप भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए लगातार परीक्षाएं दे रहा था। जनवरी 2025 में दिल्ली कैंट इलाके में उसकी मुलाकात भारतीय सेना की वर्दी पहने हुए एक व्यक्ति से हुई, जिसने अपना नाम 'बलविंदर सिंह' बताया। उसने कश्यप को झांसा दिया कि उसकी गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) में बहुत ऊंची पहुंच है और वह सेना में सरकारी नौकरी पक्की करवा सकता है।
नौकरी लगवाने के एवज में फर्जी फौजी बलविंदर सिंह ने ₹5 लाख की मांग की। साजिश के तहत कश्यप को अलग-अलग तारीखों पर धौला कुआं बुलाया गया:
फर्जी मेडिकल टेस्ट: पीड़ित कश्यप और उसके पिता को एक एर्टिगा (Ertiga) कार में बैठाकर दिल्ली कैंट के अंदर एक पोर्टेबल केबिन में ले जाया गया, जहाँ उसका बकायदा फर्जी मेडिकल एग्जामिनेशन भी कराया गया ताकि उसे शक न हो।
लाखों की वसूली: आरोपियों ने पीड़ित से किश्तों में ₹2,00,000 और ₹2,65,000 नगद ऐठे, साथ ही बैंक खातों में भी पैसे ट्रांसफर करवाए।
फेक एडमिट कार्ड: पैसे हड़पने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को व्हाट्सएप (WhatsApp) पर एक फर्जी एडमिट कार्ड भी भेजा।
कुल ₹5 लाख हड़पने के बाद जब पीड़ित की नौकरी नहीं लगी और आरोपियों के सभी मोबाइल नंबर बंद आने लगे, तब कश्यप को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद 25 जून 2025 को थाना दिल्ली कैंट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)/61(2)(b)/3(5) के तहत मुकदमा नंबर 175/2025 दर्ज किया गया था।
जांच में खुले असली नाम, कोर्ट ने किया था भगोड़ा घोषित
स्थानीय पुलिस द्वारा की गई तकनीकी जांच में सामने आया कि खुद को 'बलविंदर सिंह' बताने वाले ठग का असली नाम रौशन खान है और वह कोलकाता का रहने वाला है। वहीं, उसके साथी 'प्रखर मिश्रा' का असली नाम बाबाई हलदर है, जो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का निवासी है। पुलिस की लगातार छापेमारी के बावजूद दोनों हाथ नहीं आए, जिसके बाद 9 जनवरी 2026 को माननीय अदालत ने रौशन खान को भगोड़ा घोषित कर दिया और 16 फरवरी 2026 को दिल्ली पुलिस ने इस पर ₹20,000 का इनाम रख दिया।
दाढ़ी बढ़ाकर बना 'सरदार जी' ताकि मुस्लिम पहचान छुप सके; ससुराल में पड़ा छापा
इनामी अपराधियों की धरपकड़ के लिए एसीपी उमेश बर्थवाल (ACP/NDR) के करीबी पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर योगेश और इंस्पेक्टर विनोद यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें सब-इंस्पेक्टर दिपेंद्र, हेड कांस्टेबल राजबीर, राम निवास, परमानंद, कुलदीप और महिला कांस्टेबल ज्ञानवती शामिल थे।
टीम ने टेक्निकल सर्विलांस तेज किया। इसी बीच हेड कांस्टेबल राम निवास को पुख्ता मुखबिरी मिली कि आरोपी रौशन खान कोलकाता में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीम तुरंत कोलकाता पहुंची और घेराबंदी की। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उसे उसके ससुराल से ट्रैक किया। पुलिस तब हैरान रह गई जब देखा कि आरोपी रौशन खान ने पुलिस को चकमा देने और अपनी असल पहचान छुपाने के लिए अपनी दाढ़ी बढ़ा रखी थी और पूरी तरह एक सिख (सदर जी) का रूप धारण कर रखा था।
जब पुलिस ने उसे घेरा तो उसने खुद को 'बलविंदर सिंह' बताकर गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य सामने रखे तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने माना कि उसने जानबूझकर सिख का हुलिया अपनाया था ताकि कोई उसे मुस्लिम पहचान से न जान पाए और उस पर शक न करे। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदल रहा था। पुलिस ने उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी का प्रोफाइल
37 वर्षीय रौशन खान ने कोलकाता से ही अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की थी, जिसके बाद उसने एक टेलरिंग शॉप (दर्जी की दुकान) पर हेल्पर के रूप में काम करना शुरू किया था। साल 2025 में वह बाबाई हलदर के संपर्क में आया और दोनों ने मिलकर सेना में भर्ती के नाम पर ठगी का यह काला कारोबार शुरू कर दिया। वर्तमान में भी वह पहचान छुपाकर कोलकाता में एक टेलर की दुकान चला रहा था। पुलिस अब उसके दूसरे साथी बाबाई हलदर की तलाश में जुटी है।
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