मदनपुर खादर जमीन घोटाला: ED ने साकेत कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट; ₹45.84 करोड़ की भूमि कुर्क, ₹47.76 करोड़ का 'क्राइम प्रोसीड्स'
नई दिल्ली, 29 मई, (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में हुए एक बेहद सनसनीखेज और बड़े भू-माफिया घोटाले में बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के प्रावधानों के तहत मुख्य आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी और मैसर्स तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ साकेत कोर्ट, नई दिल्ली के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर कर दी है।
ईडी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस मामले में शामिल मुख्य आरोपियों को जांच एजेंसी द्वारा पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
दिल्ली पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच
ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की शुरुआत दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर हुई थी। यह पूरा मामला नई दिल्ली स्थित ग्राम मदनपुर खादर की खसरा संख्या 792 वाली बहुमूल्य भूमि के मालिकाना हक से जुड़ा है। आरोपियों ने इस बेशकीमती जमीन को हथियाने के लिए सामान्य मुख्तारनामा (GPA) और अन्य स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर जालसाजी और धोखाधड़ी की थी।
मरे हुए लोगों के नाम पर साल 2004 में बनाई फर्जी जीपीए
ईडी की जांच में इस पूरे सिंडिकेट का एक बेहद चौंकाने वाला और शातिर तरीका सामने आया है:
दशकों पहले मर चुके थे भूस्वामी: जिन सामान्य मुख्तारनामों (GPA) के आधार पर मदनपुर खादर की जमीन को मैसर्स तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के नाम हस्तांतरित किया गया था, उन पर 7 जनवरी 2004 की तारीख अंकित थी। लेकिन जब ईडी ने रिकॉर्ड खंगाले, तो पता चला कि जमीन के कई मूल भूस्वामियों का निधन इस तारीख (2004) से कई दशक पूर्व ही हो चुका था।
फर्जी दस्तखत और अंगूठे के निशान: मुख्य आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके साथियों ने मरे हुए मूल भूस्वामियों के फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान तैयार कर अवैध रूप से इस सरकारी व निजी भूमि को हड़पने की पूरी साजिश रची थी।
2012-13 में बैकडेटेड दस्तावेजों का खेल: तकनीकी जांच में यह भी उजागर हुआ कि यह फर्जी मुख्तारनामे वास्तव में वर्ष 2012-13 में तैयार किए गए थे, ताकि भूमि को फाउंडेशन के नाम ट्रांसफर करने से ठीक पहले इसे कानूनी रूप से सही दिखाया जा सके।
काले धन को सफेद करने के लिए बनाया दिखावटी बैंकिंग नेटवर्क
ईडी की प्रेस रिलीज के अनुसार, मुख्य आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर इस अवैध भूमि हड़पने की प्रक्रिया को पूरी तरह से वैध और 'वास्तविक लेनदेन' के रूप में दिखाने का प्रयास किया था। इसके लिए बकायदा बैंकिंग लेनदेन का एक बड़ा दिखावटी (फर्जी) तंत्र तैयार किया गया, ताकि जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके।
इसके अतिरिक्त, इस अवैध भूमि हड़पने की साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए जवाद अहमद द्वारा बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये का नकद (कैश) लेनदेन भी किया गया था। ईडी ने इस पूरे घोटाले में अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का कुल परिमाण लगभग ₹47.76 करोड़ निर्धारित किया है।
₹45.84 करोड़ की जमीन को ED ने किया कुर्क
मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कड़ा प्रहार करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में मैसर्स तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन और जवाद अहमद सिद्दीकी के अवैध कब्जे/स्वामित्व वाली मदनपुर खादर की इस विवादित भूमि को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है। कुर्क की गई इस जमीन का वर्तमान सरकारी/बाजार मूल्य लगभग ₹45.84 करोड़ आंका गया है। ईडी ने प्रेस रिलीज के अंत में स्पष्ट किया है कि इस भूमि घोटाले के सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और अन्य संपत्तियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच लगातार जारी है।
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