केरल 'डिजिटल अरेस्ट' मामला: 1.8 करोड़ की धोखाधड़ी में सीबीआई ने 5 के खिलाफ दायर की चार्जशीट
नई दिल्ली/केरल, 29 अप्रैल (अन्नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केरल के एक बहुचर्चित 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में 5 आरोपियों (जिनमें एक कंपनी भी शामिल है) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला नवंबर 2025 में केरल उच्च न्यायालय के निर्देशों पर दर्ज किया गया था, जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक महिला को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों के नाम पर डरा-धमकाकर 1.8 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी।
गिरोह का खुलासा और गिरफ्तारी
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि इस धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले अपराधी पीड़ित महिला के साथ वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में थे। चार्जशीट किए गए आरोपियों में से तीन फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में जिन मुख्य भूमिकाओं का खुलासा हुआ है, वे इस प्रकार हैं:
खाता संचालक: दो आरोपी वे हैं जो अपराध से प्राप्त राशि को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और एक संबंधित कंपनी का संचालन करते थे।
खाता प्रदाता: एक आरोपी ने साइबर अपराधियों को ये बैंक खाते उपलब्ध कराए थे।
सिम कार्ड जालसाजी: एक अन्य आरोपी ने साइबर अपराधियों को उन सिम कार्डों को धोखाधड़ी से जारी करने में मुख्य भूमिका निभाई थी, जिनका इस्तेमाल पीड़िता को धमकाने के लिए किया गया।
दक्षिण-पूर्व एशिया से चल रहा था नेटवर्क
सीबीआई की जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस साइबर अपराध के पीछे दक्षिण-पूर्व एशिया के 'स्कैम कंपाउंड्स' से संचालित होने वाले 'ट्रांस-नेशनल संगठित समूह' (अंतर-राष्ट्रीय संगठित गिरोह) का हाथ है, जो भारतीय नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं।
सीबीआई की चेतावनी: "डिजिटल अरेस्ट" नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
सीबीआई ने जनता को आगाह किया है कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई भी कानूनी शब्द या प्रक्रिया नहीं है। जांच एजेंसी ने नागरिकों को सलाह दी है कि:
ऐसी किसी भी कॉल से घबराएं नहीं और न ही अपराधियों की किसी मांग को पूरा करें।
कानून प्रवर्तन या नियामक एजेंसियों के नाम पर होने वाली किसी भी संदिग्ध कॉल या निवेश योजनाओं के प्रति सतर्क रहें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारियों या साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।
सीबीआई ने उन व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो बैंकिंग और दूरसंचार बुनियादी ढांचे के दुरुपयोग की अनुमति देकर साइबर अपराधियों की मदद करते हैं।
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