डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग महिला से 25.65 लाख ठगने वाला करनाल का आरोपी गुजरात से गिरफ्तार, CBI की बड़ी कार्रवाई
नई दिल्ली/करनाल, 2 जुलाई 2026। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के सूचना अनुभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, देश भर में आतंक मचा रहे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) साइबर फ्रॉड के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की गई है. सीबीआई ने एक बुजुर्ग महिला को डरा-धमकाकर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मूल रूप से करनाल (हरियाणा) के रहने वाले एक मुख्य आरोपी को 30 जून 2026 को राजकोट (गुजरात) से गिरफ्तार कर लिया है.
माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने दर्ज किया था मुकदमा
सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस हाईप्रोफाइल मामले की शुरुआती जांच स्टेट साइबर क्राइम, मध्य प्रदेश पुलिस (भोपाल) द्वारा की जा रही थी. लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट याचिका (क्रिमिनल) संख्या 03/2025 में 1 दिसंबर 2025 को दिए गए कड़े दिशा-निर्देशों के अनुपालन में इस केस को पुन: पंजीकरण (Re-registration) के लिए सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया. इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने 11 अप्रैल 2026 को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ नए सिरे से मुकदमा दर्ज कर तकनीकी तफ्तीश शुरू की थी.
काउंटर-टेररिज्म अफसर बनकर डराया, फर्जी अरेस्ट ऑर्डर भी भेजा
सीबीआई की तफ्तीश में सामने आई शिकायत के अनुसार, ठगों के नेटवर्क ने एक बुजुर्ग महिला (सीनियर सिटीजन) को अपना सॉफ्ट टारगेट बनाया था.
सुरक्षा एजेंसियों का फर्जीवाड़ा: अज्ञात साइबर अपराधियों ने खुद को देश की शीर्ष सुरक्षा और काउंटर-टेररिज्म (आतंकवाद विरोधी) एजेंसियों के बड़े अधिकारी बताकर पीड़िता को बेहद डरावने और धमकी भरे फोन कॉल किए.
लगाया टेरर फंडिंग का आरोप: ठगों ने महिला को झूठा झांसा दिया कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवाद से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों (Terrorism-related activities) में किया गया है.
संपत्ति जब्त करने की धमकी: आरोपियों ने महिला को तुरंत गिरफ्तार करने और उनकी पूरी संपत्ति को सीज (जब्त) करने की धमकी दी. अपनी बातों को पूरी तरह सच साबित करने के लिए शातिर ठगों ने महिला के व्हाट्सएप पर एक फर्जी और जाली कोर्ट अटैचमेंट ऑर्डर (Fabricated Attachment Order) भी भेजा, जिससे बुजुर्ग महिला बुरी तरह डर गई.
इसी मानसिक दबाव और 'डिजिटल अरेस्ट' के खौफ में आकर पीड़िता ने ठगों द्वारा बताए गए दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹25.65 लाख (25 लाख 65 हजार रुपये) ट्रांसफर कर दिए थे.
अदालत के माध्यम से ₹2.65 लाख का रिफंड वापस दिलवाया
प्रेस रिलीज के अनुसार, सीबीआई की टीम ने इस मामले की गहन जांच के दौरान न केवल गुजरात के राजकोट से करनाल निवासी आरोपी को दबोचा, बल्कि पीड़ित बुजुर्ग महिला को राहत देने की दिशा में भी काम किया. जांच एजेंसी ने सक्षम अदालत (Competent Court) से आवश्यक कानूनी आदेश प्राप्त करने के बाद पीड़ित महिला को ठगी गई कुल राशि में से ₹2.65 लाख (2 लाख 65 हजार रुपये) का रिफंड वापस सुरक्षित दिलवा दिया है।
सीबीआई की जनता से अपील: 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कानून नहीं, रहें सतर्क
सीबीआई ने इस प्रेस रिलीज के माध्यम से आम नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूक रहने के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है:
झांसे में न आएं: कानून प्रवर्तन या नियामक एजेंसियों के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट के हथकंडों और धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं से पूरी तरह सतर्क रहें.
गोपनीयता बनाए रखें: किसी भी अज्ञात या असत्यापित कॉलर के साथ अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी जैसे बैंक खाता विवरण, पासवर्ड, ओटीपी (OTP) या अन्य क्रेडेंशियल्स कभी भी साझा न करें.
यहाँ करें शिकायत: यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की संदिग्ध साइबर गतिविधि या धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत इसकी सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर (1930), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में दें.
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