न्याय की जीत: 13 साल बाद दिव्यांग छात्रा को मिला 1.37 करोड़ का मुआवजा, हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को ठहराया जिम्मेदार
चंडीगढ़, 17 फरवरी (अन्नू ): पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मंडी गोबिंदगढ़ की देश भगत यूनिवर्सिटी और इसे संचालित करने वाली संस्था 'आसरा फाउंडेशन' पर भारी जुर्माना लगाया है। अदालत ने साल 2013 में कैंपस की दीवार गिरने से 100 प्रतिशत दिव्यांग हुई एक छात्रा के पक्ष में निर्णय देते हुए संस्थान को 1.37 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। जस्टिस एचएस सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी शिक्षण संस्थान का उत्तरदायित्व केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने परिसर के भीतर विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका अनिवार्य कानूनी कर्तव्य है।
यह मामला संदीप कौर नामक छात्रा से जुड़ा है, जो घटना के समय बीएससी अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थीं। याचिका के अनुसार, यूनिवर्सिटी कैंपस के बाथरूम की दीवार अचानक गिर जाने से वह मलबे के नीचे दब गई थीं। इस दर्दनाक हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हो गया, जिसके कारण वह हमेशा के लिए पूर्ण रूप से दिव्यांग हो गईं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने शुरुआत में इलाज का पूरा खर्च उठाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन हकीकत में उन्होंने पीड़ित छात्रा को केवल 2.25 लाख रुपये की मामूली सहायता प्रदान की, जिसके बाद न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संदीप कौर के मेडिकल रिकॉर्ड, स्थायी शारीरिक अक्षमता और उनके भविष्य की संभावित आय के नुकसान का बारीकी से आकलन किया। कोर्ट ने माना कि लापरवाही के कारण एक होनहार छात्रा का जीवन पूरी तरह बदल गया। इलाज के भारी खर्च और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 1.37 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। उच्च न्यायालय ने संबंधित संस्थान को कड़ा निर्देश दिया है कि इस राशि का भुगतान अगले तीन महीनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
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