आईटीआई भरतपुर बनेगा हब: पीएम-सेतु योजना से राजस्थान में औद्योगिक विकास और युवाओं के कौशल को मिलेगा बढ़ावा
आरएस अनेजा, 5 अक्टूबर नई दिल्ली - नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पीएम-सेतु योजना सहित ₹62,000 करोड़ से अधिक की युवा केंद्रित शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण कर उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 4 अक्टूबर (शनिवार) को इन सभी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी के नेतृत्व में, मंत्रालय कौशल, श्रम और तकनीकी शिक्षा को देश की प्रगति का आधार मानते हुए युवाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में, देशभर की आईटीआई संस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिसमें 'पीएम-सेतु' योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पीएम-सेतु योजना ₹60,000 करोड़ की लागत से शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इस योजना के अंतर्गत देश भर के 1,000 सरकारी आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिन्हें 200 हब और 800 स्पोक मॉडल में संगठित किया जाएगा। पीएम-सेतु योजना के प्रथम चरण में राजस्थान के भरतपुर स्थित आईटीआई को हब के रूप में तथा आईटीआई धौलपुर, आईटीआई करौली, आईटीआई कामां और आईटीआई बयाना को स्पोक संस्थानों के रूप में उन्नत किया जाना प्रस्तावित है।
पीएम-सेतु योजना के तहत प्रत्येक हब से औसतन चार स्पोक संस्थान जुड़े होंगे, जो अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक मशीनरी, डिजिटल लर्निंग सिस्टम और उन्नत ट्रेड्स से सुसज्जित होंगे। प्रत्येक हब-एंड-स्पोक क्लस्टर का संचालन और प्रबंधन संबंधित एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की अगुवाई में किया जाएगा, ताकि उद्योग-आधारित प्रशिक्षण और संस्थागत सुधार सुनिश्चित हो सके। हब में इनोवेशन सेंटर, ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स सेंटर्स, उत्पादन इकाइयाँ और प्लेसमेंट सेवाएँ स्थापित की जाएंगी, जबकि स्पोक संस्थान प्रशिक्षण की पहुँच को व्यापक बनाएंगे।
पीएम-सेतु योजना भारत के आईटीआई ईकोसिस्टम को “सरकार-स्वामित्व, उद्योग-प्रबंधित” मॉडल में बदलेगी। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने पीएम-सेतु योजना (आईटीआई उन्नयन) के पायलट चरण के अंतर्गत दो प्रस्तावित उद्योग क्लस्टरों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे। क्लस्टर 1 में भरतपुर क्षेत्र के अंतर्गत भरतपुर, धौलपुर, करौली, कामां (डीग) और बयाना ज़िले शामिल किए गए हैं।
इस क्लस्टर का मुख्य फोकस मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और हॉस्पिटैलिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा। इसका उद्देश्य स्थानीय औद्योगिक ईकोसिस्टम और सीआईआई, फिक्की तथा अन्य स्थानीय उद्योग संगठनों से जुड़ी संस्थाओं की भागीदारी के माध्यम से उभरते हुए क्षेत्रों में कौशल विकास और रोज़गार को बढ़ावा देना है। जबकि क्लस्टर 2 में भिवाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत भिवाड़ी, अलवर, नीमराना, किशनगढ़ बस और तिजारा शामिल हैं।
यह क्लस्टर ऑटोमोटिव, मैन्युफैक्चरिंग, पावर, इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। इस क्लस्टर का उद्देश्य भिवाड़ी के मजबूत औद्योगिक आधार का लाभ उठाते हुए उद्योग संघों और विनिर्माण समूहों (मैन्युफैक्चरिंग कंसोर्टिया) के सहयोग से एक स्थाई हब-एंड-स्पोक मॉडल तैयार करना है।
इस अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी ने कहा कि “डीजीटी 14,500 से अधिक आईटीआई संचालित करता है। जैसा कि चौधरी चरण सिंह कहते थे कि देश के विकास का रास्ता खेतों, गाँवों और खलिहानों से होकर जाता है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में नए भारत के विकास के मार्ग में आईटीआई को एक मुख्य बिंदु के रूप में रखा गया है”।