03/08/26

त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम का शुभारंभ: मानेकशॉ सेंटर में तकनीक और रणनीति पर मंथन

आरएस अनेजा, 4 अगस्त नई दिल्ली - त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम के चौथे संस्करण का शुभारंभ  नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में हुआ। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य व्याख्यान दिया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने अपने संबोधन में वर्तमान समय के युद्ध के बदलते स्वरूप और सैन्य अभियानों पर उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाने और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में उनका प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता विकसित करने के महत्व पर बल दिया।

जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने भविष्य के युद्धों को आकार देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं, स्वायत्त प्रणालियों, सूचना द्वंद्व, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया की बढ़ती भूमिका पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय, एकीकरण व सहयोग की आवश्यकता भी व्यक्त की।

एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय (एचक्यू आईडीएस) के मार्गदर्शन में आयोजित चार सप्ताह के इस पाठ्यक्रम में तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ सरकार, रक्षा उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और सामरिक संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी भू-राजनीतिक, उभरती प्रौद्योगिकियों, संज्ञानात्मक एवं साइबर युद्ध, बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियान, परिदृश्य निर्माण व प्रौद्योगिकी-आधारित संघर्ष जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।


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