हिसार: "नशे के खिलाफ पुलिस की दस्तक अब हर घर तक", खैरमपुर और सदलपुर में चला जागरूकता व उपचार अभियान
हिसार, 18 जुलाई (अन्नू): नशे के खात्मे के लिए केवल कानूनी शिकंजा ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पीड़ितों का पुनर्वास भी बेहद जरूरी है। इसी विजन के साथ हिसार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिद्धांत जैन (IPS) के नेतृत्व में पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने थाना आदमपुर क्षेत्र के गांव खैरमपुर और सदलपुर में एक विशेष जनजागरूकता एवं उपचार अभियान चलाया। इस अभियान के तहत पुलिस टीम ने न केवल लोगों को जागरूक किया, बल्कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को दवाइयां और काउंसलिंग की सुविधा भी उनके घर जाकर उपलब्ध कराई।
सिर्फ तस्करों पर कार्रवाई नहीं, पीड़ितों का इलाज भी प्राथमिकता: एसपी सिद्धांत जैन
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने अभियान के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति को ही बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि हिसार पुलिस का लक्ष्य सिर्फ नशा तस्करों को जेल भेजना नहीं है, बल्कि जो लोग भटककर इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं, उन्हें सही इलाज, उचित परामर्श और सामाजिक सहयोग देकर दोबारा सामान्य जीवन की मुख्यधारा में वापस लाना है।
सरपंचों और ग्रामीणों से संवाद, नशा तस्करों की सूचना देने की अपील
अभियान के दौरान नशा मुक्ति टीम ने खैरमपुर और सदलपुर दोनों गांवों के सरपंचों, मौजिज लोगों, नशा पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ सीधा संवाद किया। टीम ने ग्रामीणों को नशे के कारण होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया। इसके साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपने आसपास एक्टिव नशा तस्करों की गोपनीय जानकारी पुलिस के साथ साझा करें, ताकि उन पर सख्त कार्रवाई की जा सके। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि सूचना देने वाले का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
18 नशा पीड़ितों को मिला इलाज, 2 स्वेच्छा से नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती
हिसार पुलिस के इस जमीनी अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिले, जिसके तहत कई स्तरों पर पीड़ितों की मदद की गई:
नए पीड़ितों की पहचान: अभियान के दौरान दोनों गांवों से 7 नए नशा पीड़ितों की पहचान की गई।
दवा व उपचार: चिन्हित किए गए नए लोगों में से 1 पीड़ित को पहली बार सरकारी अस्पताल हिसार के नशा मुक्ति केंद्र से एलोपैथिक उपचार व दवा दिलाई गई। वहीं, 12 पीड़ितों को उनके घर जाकर पहली बार आयुर्वेदिक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
फॉलो-अप इलाज: इसके अलावा, 5 पुराने नशा पीड़ितों को दूसरी बार सरकारी अस्पताल से फॉलो-अप उपचार और दवा दिलवाई गई। इस तरह कुल 18 पीड़ितों को घर या अस्पताल में इलाज, ब्लड टेस्ट और काउंसलिंग की सुविधा दी गई।
स्वेच्छा से भर्ती: पुलिस की इस मुहिम से प्रेरित होकर 2 नशा पीड़ितों ने खुद आगे आकर नशा छोड़ने का फैसला किया और वे स्वेच्छा से सरकारी अस्पताल हिसार के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती हो गए, जहां उनका विधिवत इलाज शुरू कर दिया गया है।
एसपी सिद्धांत जैन ने अंत में कहा कि एक नशा मुक्त समाज का निर्माण केवल पुलिस के अकेले प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें पंचायतों, परिवारों, शिक्षकों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे जरूरी है। जब पूरा समाज एकजुट होगा, तभी नशा तस्करों के हौसले पस्त होंगे।
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